
चंपावत+जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री मनीष कुमार ने जनपद वासियों से आगामी जनगणना 2027 को सफल बनाने हेतु सक्रिय सहयोग की अपील की है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा जनगणना के सुचारू संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके अंतर्गत यह महत्वपूर्ण कार्य जनगणना अधिनियम 1948 एवं जनगणना नियम 1990 के प्रावधानों के तहत दो चरणों में संपन्न किया जाएगा।प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं भवन गणना का कार्य उत्तराखंड में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक संचालित होगा। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए इस बार नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा, जो इस प्रक्रिया के प्रारंभ से 15 दिन पूर्व डिजिटल माध्यम से शुरू होगा।जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा का आधार है। इसी के आंकड़ों के आधार पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाती हैं, नीतियों का निर्धारण होता है तथा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन सुनिश्चित किया जाता है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत नागरिकों द्वारा दी गई समस्त जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाता है। प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह पूछे गए प्रश्नों का सही एवं स्पष्ट उत्तर दे। साथ ही, गणना अधिकारियों को परिसर में प्रवेश एवं आवश्यक चिन्हांकन की अनुमति देना भी अनिवार्य है।जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करना या जानबूझकर गलत जानकारी देना अधिनियम की धारा 11 के तहत दंडनीय अपराध है।जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने सभी जनपद वासियों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान में सहभागी बनें और सही व सटीक जानकारी प्रदान कर राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।