
हल्द्वानी :दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारा आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘धरोहर’ ने आज एक बार फिर अपनी जीवंत और आकर्षक छटा बिखेरी। इस वर्ष का विषय ‘पश्चिम बंगाल’ रहा, जिसमें राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और कलात्मकता का भव्य उत्सव मनाया गया। इस वर्ष के कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत भाषण के साथ हुआ, इसके पश्चात ज्ञान और प्रकाश के प्रतीक दीप प्रज्वलन की पावन परंपरा का निर्वहन किया गया।
प्रदर्शनी में पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विविधता की सजीव झलक देखने को मिली जिसमें साहित्य और कला की बौद्धिक ऊँचाई से लेकर दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों की आध्यात्मिक गहराई तथा शास्त्रीय और लोक नृत्यों की भव्यता को दर्शाया गया। अत्यंत सूक्ष्मता से तैयार किए गए प्रदर्शनों ने बंगाल की हथकरघा बुनाई, टेराकोटा कला और पारंपरिक शिल्पकला की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।
खान-पान अनुभाग कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण रहा, जहाँ राज्य की प्रसिद्ध मिठाइयों ने सभी का मन मोह लिया। यह अनुभाग कार्यक्रम की थीम पश्चिम बंगाल –“भारत की सांस्कृतिक मिठास का अनुपम उत्सव” को पूरी तरह साकार करता हुआ दिखाई दिया और राज्य की सांस्कृतिक मिठास को दर्शाता रहा।
उत्सव की शुरुआत मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई, जिनमें पश्चिम बंगाल के पारंपरिक संगीत और नृत्य शैलियों की शानदार प्रस्तुति दी गई। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विविध प्रस्तुतियों और प्रदर्शनों के माध्यम से कोलकाता की ऐतिहासिक धरोहर हावड़ा ब्रिज, ट्राम संस्कृति, सुंदवन तथा रॉयल बंगाल टाइगर को अत्यंत प्रभावशाली तथा रचनात्मक ढंग से विभिन्न पहलुओं को उजागर किया; इससे यह कार्यक्रम अत्यंत जीवंत और अनुभव-समृद्ध बन गया।
‘धरोहर’ के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनियों ने बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं को अत्यंत सुंदर ढंग से चित्रित किया, और आगंतुकों को इसके इतिहास, जीवनशैली तथा कलात्मक विरासत का एक समृद्ध अनुभव प्रदान किया।
‘धरोहर’ उत्सव ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर को जिस सुंदरता और जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया, वह वास्तव में सराहनीय है। यह आयोजन न केवल परंपराओं को संजोने का माध्यम बना, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी सिद्ध हुआ। इस प्रकार, यह उत्सव पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक मिठास का एक अनुपम और यादगार उत्सव बनकर सभी के मन में अपनी छाप छोड़ गया।
कार्यक्रम का समापन प्रोवाइस चेयरमैन, श्री विवेक अग्रवाल तथा प्रधानाचार्या सुश्री रंजना शाही द्वारा दिए गए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने धरोहर को संस्कृति और परंपरा का एक यादगार उत्सव बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया।