चंपावत: जनपद स्तरीय पशु क्रूरता अधिनियम की बैठक समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी नवनीत पाण्डे की अध्यक्षता जिला कार्यालय सभागार में सम्पन्न हुई!

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चंपावत:जनपद स्तरीय पशु क्रूरता अधिनियम की बैठक समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी नवनीत पाण्डे की अध्यक्षता जिला कार्यालय सभागार में सम्पन्न हुई।
बैठक में जिलाधिकारी द्वारा जिले में निराश्रित
गौवंश हेतु गौसदन की स्थापना एवं आवारा पशुओं को उनमें रखने के साथ ही गौवंश पशुओं की उचित सुरक्षा हेतु पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत जिले में प्राथमिकता के तहत प्रवर्तन की कार्यवाही करने के निर्देश पशुपालन विभाग को दिए। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा आगामी देवीधुरा बागवाला मेले में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 को क्रियान्वित करने हेतु भी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने सभी नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा गौवंश पशुओं को तत्काल क्षेत्र के नजदीक गौसदन में भेजने हेतु सभी निकायों के अधिशासी अधिकारियों,खण्ड विकास अधिकारियों व अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को दिए। साथ ही जिलाधिकारी ने कहा कि पशुक्रूरता को रोके जाने हेतु जिले की सीमाक्षेत्र के सभी बैरियरों में गहन चैकिंग की जाय, साथ ही जनता को भी जागरूक किया जाय।
जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तराखंड गोवंश अधिनियम 2007 के अनुसार गौवध प्रतिबंधित है इस संबंध में भी व्यापक प्रचार प्रसार किया जाना अति आवश्यक है जिलाधिकारी द्वारा पशुपालन विभाग को इस संबंध में विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक पशु चिकित्सा अधिकारी भी अपने क्षेत्रान्तर्गत लोगों को इस संबंध में जागरूक करें।
जिलाधिकारी ने समस्त
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका व नगर पंचायत को निर्देश दिए कि तत्काल निकाय क्षेत्र में गौवंश को पंजीकरण किए जाने हेतु कार्यवाही करना सुनिश्चित करें इस हेतु पशुपालन विभाग भी अपना सहयोग देना सुनिश्चित करें।
बैठक में जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका चंपावत को पशु प्रजनन केन्द्र नरिया गांव क्षेत्र की खाली पड़ी भूमि में गौशाला एवं एबीसी केन्द्र संचालित करने हेतु डीपीआर बनाने के निर्देश दिए गए, इस संबंध में अधिशासी अधिकारी द्वारा बताया कि इस संबंध में डीपीआर बना ली गई है, शीघ्र ही उसे स्वीकृति हेतु निदेशालय को प्रेषित किया जाएगा।
बैठक में जिले में संचालित गौशालाओं के बारे में भी समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी गौशाला संचालकों को क्षमता के अनुरूप ही गौसदन में गौवंश रखे जाने के निर्देश दिए और पशुपालन विभाग को नियमित इनका निरीक्षण भी करने को कहा।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी वसुंधरा गर्ब्याल ने अवगत कराया कि जिले में वर्तमान में कुल 04 गौ सदन संचालित हो रहे हैं। जिनमें कुल 620 निराश्रित गोवंश हैं। इन चारों गौशालाओं को इस वित्तीय वर्ष में कुल 83 लाख 15 हजार 520 रुपए की धनराशि अनुदान के रूप में भरण पोषण हेतु अवमुक्त कर दी गई है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी दिनेश सिंह दिगारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी समेत गौशाला संचालक उपस्थित रहे।

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