
चंपावत 11 अक्टूबर ।
जिले के बाराकोट ब्लॉक स्थित गांव खलकीना में इन दिनों मसालों की भीनी-भीनी खुशबू सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वहां की ग्रामीण महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य की महक बन चुकी है।
कभी चूल्हे-चौके और घरेलू दायरों तक सिमटी रहने वाली यहां की महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी विजन से प्रेरित होकर आज स्वरोजगार की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
इस परिवर्तन की मुख्य सूत्रधार बनी हैं ‘सखी स्वयं सहायता समूह’ की अध्यक्ष श्रीमती कलावती देवी, जिनके कुशल और प्रेरणादायक मार्गदर्शन में समूह की महिलाओं ने मिलकर एक आधुनिक मसाला उद्यम की नींव रखी।
आज यह समूह शुद्धता और गुणवत्ता का पर्याय बन चुका है। महिलाएं अपने ही ग्रामीण अंचल से बेहतरीन और शुद्ध कच्चा माल एकत्र करती हैं और अपनी देखरेख में उसकी पिसाई कर बेहद आकर्षक पैकेजिंग तैयार करती हैं। हल्दी, धनिया, मिर्च और जीरे जैसे रोजमर्रा के इन शुद्ध मसालों की मांग अब स्थानीय बाजारों में तेजी से बढ़ रही है।
इस सफलता के पीछे राज्य सरकार की बहुप्रशंसित ‘ग्रामोत्थान योजना’ की एक बहुत बड़ी भूमिका रही है।…
कुल दस लाख रुपए की लागत से खड़े हुए इस आत्मनिर्भरता के पंख वाले प्रोजेक्ट में ग्रामोत्थान योजना ने छह लाख रुपए की विशेष आर्थिक सहायता प्रदान कर महिलाओं का हौसला बढ़ाया। इसके साथ ही, उद्यम के सुचारू संचालन के लिए तीन लाख रुपए का बैंक ऋण और एक लाख रुपए महिलाओं का अपना स्व-योगदान शामिल रहा, जिसने इस सामूहिक सपने को धरातल पर उतार दिया।
इस सशक्त पहल के परिणाम स्वरूप समूह की महिलाएं हर महीने पंद्रह से बीस हजार रुपए तक की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। यह सिर्फ कुछ रुपयों की कमाई नहीं है, बल्कि यह उन पहाड़ी महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आर्थिक आज़ादी की एक जीवंत कहानी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस विजन ने साबित कर दिया है कि जब पहाड़ की मातृशक्ति को सही संबल और अवसर मिले, तो वे अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से विकास की नई इबारत लिखने की पूरी क्षमता रखती हैं।

