
रानीखेत । उत्तराखंड की खाली हो रही एक राज्यसभा सीट के लिए आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होना तय हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जिसके चलते प्रदेश की सियासत में नए चेहरों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी क्रम में, भाजपा के भीतर पूर्व दर्जा राज्य मंत्री और वरिष्ठ कार्यकर्ता रवि मोहन अग्रवाल को राज्यसभा सदस्य बनाने की मांग तेजी से जोर पकड़ रही है।
संगठन और कार्यकर्ताओं में भारी समर्थन
भाजपा गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, रवि मोहन अग्रवाल को राज्यसभा भेजने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा धड़ा खुलकर लामबंद हो रहा है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बेहद करीबी और विश्वसनीय माने जाने वाले रवि मोहन अग्रवाल की छवि संगठन के प्रति समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता की रही है।
कार्यकर्ताओं का तर्क है कि रवि मोहन अग्रवाल ने लंबे समय तक उत्तराखंड में भाजपा संगठन को मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दिया है। ‘भगत दा’ (भगत सिंह कोश्यारी) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले अग्रवाल को उच्च सदन में भेजकर पार्टी एक कर्मठ और वफादार कार्यकर्ता को बड़ा सम्मान दे सकती है।
सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश
उत्तराखंड की इस इकलौती खाली हो रही सीट पर भाजपा हमेशा नए चेहरों और क्षेत्रीय-सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देती आई है। नरेश बंसल के हटने के बाद वैश्य समाज और मैदानी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए रवि मोहन अग्रवाल के नाम को काफी मजबूत माना जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यकर्ताओं की इस बढ़ती मांग और सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर पर मिल रहे भारी समर्थन की गूंज अब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश हाईकमान तक भी पहुंचने लगी है।
16 अक्टूबर को होगी वोटिंग
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। चूंकि उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 47 विधायकों का स्पष्ट और मजबूत बहुमत है, इसलिए भाजपा प्रत्याशी की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करते हुए रवि मोहन अग्रवाल के नाम पर मुहर लगाता है या फिर किसी अन्य चेहरे को आगे बढ़ाता है।रवि मोहन पहाड़ी मूल के होने के कारण पर्वतीय ओर मैदानी दोनों क्षेत्रों मे बराबर की पकड़ रखते है। कुमाऊँ एवं गढ़वाल क्षेत्र के कद्दावर नेताओं नें उनके नाम की पैरवी की। इधर और रवि मोहन अग्रवाल का कहना है , जो भी हाई कमान का निर्देश होगा वह मान्य होगा|मैं तो एक छोटा सा भाजपा का सिपाही हूं,|