रानीखेत: विधानसभा (50) डॉ. प्रमोद नैनवाल के टिकट पर संकट के बादल? रसूखदारों की फौज और भू-कारोबारियों के वर्चस्व से धूमिल हो रही छवि,✅ बैठक में 12 दावेदारों ने बढ़ाई मुसीबत,✅”एक अनार, बारह बीमार”; बैठक में एक दर्जन दिग्गजों ने ठोकी दावेदारी!!✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ/संदीप पाठक ब्यूरो चीफ एक्सक्लूसिव

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रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय राजनैतिक घटनाक्रमों, पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी, बैठक के इनपुट और क्षेत्र में चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित एक स्वतंत्र विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है..!

रानीखेत विधानसभा (50) सीट पर आगामी चुनाव से पहले भारतीय पार्टी के भीतर मची अंदरूनी कलह और जबरदस्त खींचतान अब खुलकर चौराहे पर आ गई है। क्षेत्र के बदलते राजनीतिक समीकरण साफ इशारा कर रहे हैं कि वर्तमान विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल की चुनावी राह अब कतई आसान नहीं रहने वाली है। हाल ही में हुई संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि नैनवाल के दोबारा टिकट मिलने पर गंभीर संशय के बादल मंडराने लगे हैं, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनके इर्द-गिर्द रहने वाले रसूखदारों और विवादित चेहरों की फौज को माना जा रहा है।

  1. रसूखदार, ठेकेदार और भू-कारोबारी कर रहे हैं छवि को जमींदोज

स्थानीय स्तर पर और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विधायक के इर्द-गिर्द आम जनता और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बजाय रसूखदार, बड़े ठेकेदार और भू-कारोबारियों (Land Operators) का एक बड़ा सिंडिकेट हावी हो चुका है।

  • मंचों पर कब्जा और जनता से दूरी: क्षेत्र में चर्चा है कि सालों तक पार्टी के लिए लाठियां खाने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को हाशिए पर धकेल दिया गया है और सरकारी मंचों से लेकर सांगठनिक कार्यक्रमों में केवल रसूखदार पूंजीपतियों को ही अहमियत मिल रही है।
  • छवि को भारी नुकसान: विधायक के ‘खास’ चेहरों के रूप में इन विवादित और आर्थिक रूप से रसूखदार लोगों का आगे रहना डॉ. प्रमोद नैनवाल की छवि को बुरी तरह डैमेज कर रहा है। आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि विकास कार्य आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा ठेकेदारों और भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए हो रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा विधायक को भुगतना पड़ सकता है।

संगठन के भीतर विधायक के खिलाफ पनप रहे इसी भारी असंतोष का नतीजा है कि इस बार पार्टी में दावेदारों की बाढ़ आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, हालिया बैठक में मौजूदा विधायक के सामने ही 12 उम्मीदवारों ने टिकट के लिए अपनी मजबूत दावेदारी ठोक कर आलाकमान को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। दावेदारों की सूची इस प्रकार है:

  • डॉ. प्रमोद नैनवाल (वर्तमान विधायक)
  • दीप पांडे,लीला बिष्ट,कैलाश पंत,विमला रावत,शांति उप्रेती,मोहन नेगी,दीप भगत,धन सिंह रावत,धन सिंह रावत,रोहित शर्मा,गिरीश भगत,प्रमोद रावत|
    एक ही सीट पर इतने बड़े नामों की दावेदारी यह साफ दर्शाती है कि संगठन के भीतर वर्तमान विधायक की स्वीकार्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। धन सिंह रावत, दीप पांडे और कैलाश पंत जैसे वरिष्ठ चेहरों की सक्रियता ने नैनवाल के खेमे में बेचैनी पैदा कर दी है।

पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और मंडल अध्यक्षों से नाराजगी

पार्टी के मूल कैडर और पुराने कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि वर्तमान व्यवस्था में उनकी पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। इसके साथ ही, स्थानीय पदाधिकारियों और मंडल अध्यक्षों की कार्यशैली से भी आम जनता और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा धड़ा बेहद नाखुश है। सांगठनिक स्तर पर उपजा यह गुस्सा साफ संकेत दे रहा है कि यदि भाजपा आलाकमान ने समय रहते दखल नहीं दिया, तो चुनाव में इसका बहुत बुरा खामियाजा भुगतना पड़ेगा और भितरघात के कारण सीट हाथ से निकल सकती है।

विचार परिवार (RSS-VHP) ने भी तानी भौहें!

विधायक की मुश्किलें केवल पार्टी तक सीमित नहीं हैं। वैचारिक रूप से भाजपा की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे आनुषंगिक संगठनों के स्थानीय कैडर में भी वर्तमान विधायक और उनके इर्द-गिर्द सक्रिय पूंजीपतियों को लेकर गहरी नाराजगी दिखाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो इन संगठनों के पदाधिकारियों में समन्वय की भारी कमी है, जो चुनाव प्रबंधन के लिहाज से प्रमोद नैनवाल के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हो सकता है।

जिला मांग पर ‘रणनीतिक शांति’ या कमजोरी?

रानीखेत को नया जिला बनाने की बेहद संवेदनशील और पुरानी मांग पर विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल का पूरी तरह मौन रहना या जरूरत से ज्यादा सतर्क रुख अपनाना भी अब उनके खिलाफ जा रहा है। वे रानीखेत और भिकियासैंण दोनों जगह अपना समीकरण साधने के चक्कर में किसी भी तरह के सीधे स्टैंड से बच रहे हैं, लेकिन जनता इसे उनकी राजनीतिक कमजोरी और पक्षपात से बचने का बहाना मान रही है।

लटके विकास कार्य और उपजा असंतोष

क्षेत्र की जनता बयेडी पंपिंग पेयजल योजना में आ रही लगातार दिक्कतों, बदहाल चिकित्सा सुविधाओं और खस्ताहाल आंतरिक सड़कों को लेकर विधायक के कार्यकाल से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। हालांकि, विरोधी सुरों के बीच बैठक में नेताओं ने औपचारिक रूप से यही कहा कि वे संगठन के सामने कार्यकर्ताओं की बात रख रहे हैं, लेकिन अंदरूनी हकीकत यही है कि रानीखेत में भाजपा का अंदरूनी लावा कभी भी फट सकता है और प्रमोद नैनवाल का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है।
यह रिपोर्ट रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय राजनैतिक घटनाक्रमों, पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी, बैठक के इनपुट और क्षेत्र में चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित एक स्वतंत्र विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है।

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