
रानीखेत। उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाताओं के संबंध में लगाई गई आपत्तियों को लेकर बुधवार को रानीखेत विधानसभा क्षेत्र में संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपत्तियों से प्रभावित मतदाताओं, आपत्तिकर्ताओं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखा।
बैठक में उपस्थित कुछ आपत्तिकर्ताओं ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष कहा कि उन्हें गुमराह कर आपत्तियाँ लगवाई गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत जानकारी देकर उनसे आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं, जिससे क्षेत्र के आपसी सौहार्द को प्रभावित करने की कोशिश की गई है।
बैठक में कुछ ऐसे आपत्तिकर्ता भी उपस्थित नहीं हुए, जिनके द्वारा मतदाताओं के नाम अथवा पात्रता को लेकर आपत्तियाँ दर्ज कराई गई थीं। संबंधित मतदाताओं ने प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों से इन आपत्तियों की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराने की मांग की।
मतदाताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर गलत, भ्रामक अथवा बेबुनियाद आपत्ति दर्ज कराई गई है तो उसकी जांच की जाए और दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध निर्वाचन कानूनों एवं लागू कानूनी प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मतदाताओं ने आवश्यकता पड़ने पर झूठी आपत्ति दर्ज कराने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने की भी मांग की।
रानीखेत कांग्रेस ने जताया विरोध
रानीखेत कांग्रेस कमेटी की ओर से कहा गया कि भाजपा के BLA-1, BLA-2 एवं उनके कार्यकर्ताओं द्वारा बदनीयती से लगाई गई कथित बेबुनियाद एवं फर्जी आपत्तियों का कांग्रेस पार्टी विरोध करती है। कांग्रेस के उपस्थित BLA-1 एवं BLA-2 ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
कांग्रेस प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार उसके संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा हुआ है। रानीखेत कांग्रेस कमेटी रानीखेत विधानसभा के प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी पात्र मतदाता के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार का हनन नहीं होने देगी।
कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की कि SIR के अंतर्गत प्राप्त प्रत्येक आपत्ति की निष्पक्षता और तथ्यों के आधार पर जांच की जाए तथा पात्र मतदाताओं के नाम केवल वैधानिक प्रक्रिया और पर्याप्त सत्यापन के बाद ही प्रभावित किए जाएं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी प्रकार की मनमानी या राजनीतिक दुर्भावना के आधार पर हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए पात्र मतदाताओं के मताधिकार को सुरक्षित रखने की मांग की।