दलित सियासत का समीकरण…?


देहरादून : उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा ने राज्यसभा के लिए दिनेश आर्य के नाम पर दांव खेलकर एक ऐसा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, जिसे आने वाले दिनों की सियासत के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने उत्तराखंड में होने वाले राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए विश्लेषकों को चौंकाते हुए दायित्वधारी दिनेश आर्य को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है।
पार्टी केंद्रीय कार्यालय की ओर से 4 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनके नाम की स्वीकृति की जानकारी दी गई।
दिनेश आर्य हल्द्वानी से ताल्लुक रखते हैं। और मौजूदा समय में राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं। आर्य नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
गौरतलब है कि कई बड़े नेता राज्यसभा की दौड़ इन थे। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने कुमाऊं के पार्टी नेता दिनेश आर्य पर भरोसा जताया।
केंद्रीय नेतृत्व ने विधानसभा
उत्तराखंड के अलावा पश्चिम बंगाल में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए रुक्मिणी मल्लिक (कोयल मल्लिक) को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है।
उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव होना है। भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाए जाने के बाद अब दिनेश आर्य पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में होंगे। पार्टी ने पश्चिम बंगाल की राज्यसभा उपचुनाव सीट के लिए भी अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। ध्यान देने की बात यह है किनैनीताल की राजनीति से बनाई पहचान
दिनेश आर्य की राजनीतिक सक्रियता का प्रमुख केंद्र नैनीताल रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने नैनीताल सीट से भाजपा टिकट के लिए दावेदारी की थी। उस समय पार्टी के भीतर टिकट को लेकर उनकी सक्रियता सामने आई थी। चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भी संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही|