सब्जी और दूध का संकट: हल्द्वानी से तड़के चलने वाले हरी सब्जियों, फल और दूध के वाहन दोपहर या शाम तक भी रानीखेत नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे ये सामान बाजार में पहुंचने से पहले ही खराब हो रहे हैं या भारी किल्लत के कारण दाम आसमान छू रहे हैं..

रानीखेत:
कुमाऊं के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम (नीम करौली बाबा आश्रम) में उमड़ रहा आस्था का सैलाब अब पहाड़ों की जीवनरेखा कहे जाने वाले अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग 109 के लिए एक बड़ा नासूर बन चुका है। कैंची धाम और भवाली क्षेत्र में लगने वाले मीलों लंबे ट्रैफिक जाम के कारण रानीखेत शहर की पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। मैदान से पहाड़ को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग घंटों और कभी-कभी पूरे दिन ठप रहने की वजह से रानीखेत में आवश्यक दैनिक वस्तुओं का संकट खड़ा हो गया है। सबसे दर्दनाक स्थिति आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की है, जहां जीवन-मौत से जूझ रहे मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस रेंगने को मजबूर हैं।
देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल ने जताई गहरी चिंता, सरकार से हस्तक्षेप की मांग
रानीखेत की इस चरमराती स्थिति पर स्थानीय व्यापारियों और प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल रानीखेत के नगर संयोजक संदीप पाठक ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से तुरंत ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया है।
व्यापार मंडल के संयोजक संदीप पाठक ने कहा:
“कैंची धाम में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ का हम स्वागत करते हैं, लेकिन रानीखेत और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की आम जनता और व्यापारियों को अपनी आजीविका व बुनियादी सुविधाओं को खोकर नहीं चुकानी चाहिए। इस महाजाम की वजह से हल्द्वानी से रानीखेत आने वाला व्यापारिक सामान, ताजी सब्जियां, फल और दवाइयां रास्ते में ही सड़ या अटक रही हैं। सबसे दुखद यह है कि गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस घंटों जाम में फंसी रह रही हैं। मुख्यमंत्री और शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग है कि रानीखेत के लिए आवश्यक रसद और एम्बुलेंस सेवाओं को सुचारू रखने के लिए एक विशेष इमरजेंसी ‘नो-स्टॉपेज कॉरिडोर’ बनाया जाए। यदि जल्द ही कोई ठोस कार्य योजना लागू नहीं की गई, तो व्यापार मंडल आंदोलन को बाध्य होगा।”
जिंदगी पर भारी ‘जाम’: तड़प रहे मरीज, बेबस एम्बुलेंस
इस महाजाम का सबसे खौफनाक चेहरा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। रानीखेत और आसपास के ग्रामीण इलाकों से गंभीर मरीजों को जब हायर सेंटर (सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी) के लिए रेफर किया जाता है, तो वे कैंची धाम-भवाली बेल्ट में पूरी तरह फंस जाते हैं।घंटों का सफर: जो दूरी सामान्य तौर पर 2 घंटे में तय होनी चाहिए, उसे पार करने में एम्बुलेंस को 5 से 6 घंटे का समय लग रहा है।
अतीत की त्रासदियां: पूर्व में भी इस मार्ग पर समय से इलाज न मिलने के कारण मरीजों की एम्बुलेंस में ही मौत होने जैसी दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रशासन अब तक कोई सुरक्षित ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाने में नाकाम रहा है। जाम में फंसे तीमारदार केवल भगवान भरोसे रहने को मजबूर हैं।
रानीखेत में हाहाकार: राशन, सब्जी और ईंधन की किल्लत
रानीखेत पूरी तरह से मैदानों (हल्द्वानी/रामनगर) से आने वाली रसद पर निर्भर है। कैंची धाम में गाड़ियों के पहिये थमने से रानीखेत के बाजारों की रौनक गायब हो गई है:
- सब्जी और दूध का संकट: हल्द्वानी से तड़के चलने वाले हरी सब्जियों, फल और दूध के वाहन दोपहर या शाम तक भी रानीखेत नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे ये सामान बाजार में पहुंचने से पहले ही खराब हो रहे हैं या भारी किल्लत के कारण दाम आसमान छू रहे हैं।
- ईंधन और रसद की देरी: पेट्रोल-डीजल के टैंकर और आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयों की सप्लाई समय पर न होने से स्थानीय मेडिकल स्टोर और पेट्रोल पंप भी प्रभावित हो रहे हैं।
- क्षमता से अधिक वाहन: कैंची धाम और भवाली के पास केवल 2 से 3 हजार वाहनों की पार्किंग क्षमता है, जबकि वीकेंड और लंबे सप्ताहांत पर 30 हजार से 50 हजार से अधिक गाड़ियां इस संकरे पहाड़ी मार्ग पर आ रही हैं।कागजी साबित होते रूट डायवर्जन: पुलिस द्वारा प्रशासन के निर्देश पर समय-समय पर रूट डायवर्जन प्लान तो लागू किया जाता है, लेकिन धरातल पर भारी वाहनों और पर्यटकों की मनमानी के आगे यह व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है।बाईपास निर्माण की धीमी गति: हालांकि सरकार सैनिटोरियम-रातीघाट बाईपास (18 किमी) को पूरा करने के दावे कर रही है, लेकिन जब तक यह सुचारू रूप से भारी ट्रैफिक संभालने के लिए तैयार नहीं होता, तब तक रानीखेत की जनता इस समस्या से पिसती रहेगी।
✅निष्कर्ष: व्यापार मंडल और स्थानीय निवासियों के इस बढ़ते आक्रोश के बाद अब गेंद पूरी तरह शासन के पाले में है। यदि समय रहते रानीखेत के लिए सप्लाई चेन और स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह शांत सैन्य-पर्यटन नगरी बड़े संकट की चपेट में आ जाएगी।