बिग ब्रेकिंग धराली: (उत्तरकाशी) ”धामी बेटा”, तू आ गया तो हिम्मत मिल गई,” बुज़ुर्ग ‘कांपते हाथ’ ‘अश्रुपूर्ण नेत्रों’ से आवाज़ ने सीएम धामी को ‘भावुक’ कर दिया,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है, वे केवल शासन के नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना के प्रतीक नेता हैं,जननेता की वह छवि, जो हर दिल को छू गई! Ashok Gulati editor in chief एक्सक्लूसिव

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“प्रशासन नहीं, परिवार हूं मैं” — मुख्यमंत्री की पीड़ितों से सीधी बात..

धराली: (उत्तरकाशी) ”धामी बेटा”, तू आ गया तो हिम्मत मिल गई,” बुज़ुर्ग की ‘अश्रुपूर्ण नेत्रों’ से आवाज़ ने सीएम धामी को ‘भावुक’ कर दिया,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है, वे केवल शासन के नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना के प्रतीक नेता हैं,जननेता की वह छवि, जो हर दिल को छू गई! Ashok Gulati editor in chief एक्सक्लूसिव

आपदा की मार झेल रहे उत्तरकाशी के धराली गांव में जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे, तो राहत शिविर में एक भावुक दृश्य सामने आया। अपने आशियाने से उजड़ चुकी एक बुज़ुर्ग महिला कांपते हाथों से मुख्यमंत्री का चेहरा छूते हुए बोलीं — “धामी बेटा, तू आ गया तो हिम्मत मिल गई।” उन शब्दों ने माहौल को गहराई से भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री की आंखों में भी नमी आ गई। कुछ पल के लिए वे चुप रहे, फिर धीरे से बोले आपका दुख मेरा है। यह क्षण केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, यह एक मुख्यमंत्री और एक पीड़िता के बीच मानवीय रिश्ते का गहरा जुड़ाव था। सीएम धामी ने न केवल सांत्वना दी, बल्कि हर पीड़ित से व्यक्तिगत संवाद कर उनके दुःख को अपना दुःख समझा। मुख्यमंत्री ने धराली में रातभर रुकने का निर्णय लेकर पीड़ितों अपने होने का एहसास कराया। उन्होंने कहा कि जब तक अंतिम पीड़ित को राहत नहीं मिल जाती, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने राहत शिविरों में बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “मैं यहां सरकार बनकर नहीं, आपका अपना बनकर आया हूं। जब तक आप सुरक्षित नहीं, तब तक मेरा कर्तव्य पूरा नहीं।”
मुख्यमंत्री का यह संवेदनशील व्यवहार प्रभावितों के लिए मानसिक संबल बन गया है। उनके आने से राहत शिविरों में न केवल भरोसा लौटा, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी में भी एक नई ऊर्जा का संचार हुआ।राहत शिविर में बिताई रात, पीड़ितों के साथ खड़े रहे हर पल रात भर चलती रही निगरानी, अधिकारियों को दिए ज़मीनी निर्देश…

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वे केवल शासन के नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना के प्रतीक नेता हैं। उत्तरकाशी में आपदा से उत्पन्न हालात के बीच उन्होंने अपनी पूरी रात राहत क्षेत्र में ही रहकर बिताई, न केवल हालात का जायजा लिया, बल्कि हर जरूरतमंद के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए।
जहाँ आमतौर पर प्रशासनिक दौरों में औपचारिकता की झलक मिलती है, वहीं मुख्यमंत्री धामी का यह रात्रि प्रवास एक मानवीय मिशन बनकर सामने आया। उन्होंने न सिर्फ राहत शिविरों में पहुंचकर प्रभावितों से संवाद किया, बल्कि खुद रातभर अधिकारियों के साथ बैठकें कर हालात की बारीकी से निगरानी की।धामी रात में भी लगातार सक्रिय रहे। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की, प्रभावित इलाकों में खाद्यान्न, पानी, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर स्वयं निगरानी रखी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी व्यक्ति राहत से वंचित न रहे।

“प्रशासन नहीं, परिवार हूं मैं” — मुख्यमंत्री की पीड़ितों से सीधी बात…

मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं से बातचीत की, उनकी ज़रूरतें जानीं और उन्हें आश्वस्त किया कि “आप अकेले नहीं हैं, पूरा उत्तराखंड आपके साथ है।”
उन्होंने साफ कहा, “यह समय केवल सरकारी कार्रवाइयों का नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह साथ खड़े होने का है। मैं यहां एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक उत्तराखंडी बेटे के रूप में हूं।”…

जननेता की वह छवि, जो हर दिल को छू गई

उत्तरकाशी। धामी की यह पहल केवल प्रशासनिक नेतृत्व नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल है। …

एक ऐसी छवि जो लोगों के दिलों में भरोसा और उम्मीद भरती है। जिन आंखों में भय था, उनमें अब मुख्यमंत्री की उपस्थिति से आश्वासन की चमक दिखी। मुख्यमंत्री धामी का यह व्यवहार राजनीति से परे जाकर जनसेवा की परिभाषा गढ़ता है। उत्तरकाशी की इस रात ने साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री केवल राज्य का मुखिया नहीं होता, वह हर उस व्यक्ति की उम्मीद बनता है जो संकट में है। और धामी ने यह भूमिका पूरे समर्पण और संवेदना के साथ निभाई। बरहाल युवा मुख्यमंत्री ने स्वयं ग्राउंड जीरो में आकर युद्ध स्तरीय कार्रवाई करने से अधिकारियों को भी बल मिला, इस आपदा से पीड़ित लोगों को जख्म भरने में कई बरस लग जाएंगे, परंतु मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं मोर्चा संभालने से तत्काल पीड़ितों को सहायता मिल सखी|

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