
रानीखेत। आज रानीखेत में नव-उद्घाटित ‘सखी हाट बाजार’ को लेकर स्थानीय महिलाओं (सखियों) में खुशी के साथ-साथ एक गहरी चिंता भी देखने को मिली। जब हमारे संवाददाता ने बाजार में मौजूद सखियों से बातचीत की, तो उन्होंने व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
दबंगों के कब्जे का डर:
सखियों ने साफ तौर पर अंदेशा जताया कि कहीं इस नए हाट बाजार का हश्र भी पुराने हाट बाजार जैसा न हो जाए। उन्हें डर है कि वक्त बीतने के साथ यहां भी रसूखदार और दबंग लोग अपना अवैध कब्जा न जमा लें, जिससे मूल हकदार सखियां हाशिए पर चली जाएं।

प्लास्टिक बाजार बनने की आशंका:
महिलाओं ने पुराने हाट बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां धीरे-धीरे हर तरफ प्लास्टिक और रेडीमेड सामान की दुकानें खुल गईं, जिससे उसका मूल स्वरूप ही बिगड़ गया। सखियों को डर है कि अगर प्रशासन ने सख्त निगरानी नहीं रखी, तो यह नया मंच भी स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों के बजाय सिर्फ ‘प्लास्टिक बाजार’ बनकर रह जाएगा।
“प्रशासनिक गारंटी की जरूरत”
सखियों ने मांग की है कि इस नए हाट बाजार को दबंगों और प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए प्रशासन को सख्त नियम बनाने चाहिए, ताकि महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता सुरक्षित रह सके।

