बिग ब्रेकिंग नई दिल्ली:किच्छा, सिरौलीकलां [उधम सिंह नगर] नगर पालिका चुनाव मतगणना मामला: सुप्रीम कोर्ट का आदेशए दोनों निकायों कीहुए दोनों निकायों की मतगणना 7 अक्टूबर,9 अक्टूबर को मतगणना संबंधी आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करें! Ashok gulati एडिटर इन चीफ

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नई दिल्ली। किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत मतगणना कराने का आदेश दिया है।
इस मामले में कोर्ट के मुख्य फैसले और घटनाक्रम की जानकारी इस प्रकार है:

विवाद की वजह: इन दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया था। हालांकि, स्ट्रांग रूम के बाहर हुए राजनीतिक दलों के हंगामे और कानून व्यवस्था का हवाला देकर प्रशासन व राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना (काउंटिंग) को अगले आदेश तक के लिए टाल दिया था, जिसे प्रत्याशियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब प्रशासन को इसी हफ्ते बुधवार को मतों की गिनती करानी होगी और चुनाव के नतीजे साफ हो जाएंगे किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना को लेकर चल रहा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों निकायों की मतगणना 7 अक्टूबर को कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने 9 अक्टूबर को मतगणना संबंधी आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मतगणना के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किच्छा निवासी सभासद प्रत्याशी अलीना मलिक की ओर से मतगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। याचिका अलीना मलिक बनाम स्टेट ऑफ उत्तराखंड एंड अदर्स के नाम से दाखिल हुई है। मामले का केस नंबर SLP(C) No. 35514/2026 है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ,न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल रहे।

तत्काल मतगणना का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को किच्छा और सिरौली कलां में बुधवार को ही तत्काल मतगणना शुरू करने और शुक्रवार तक इसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव: इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कानून व्यवस्था और हंगामे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को 3 सप्ताह के भीतर मतगणना कराने का समय दिया था। लेकिन प्रत्याशियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने 3 हफ्ते की ढील को खत्म कर तुरंत (इसी बुधवार को) मतगणना कराने की तारीख तय कर दी है।सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका में मतगणना जल्द कराने की मांग की गई। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने 7 अक्टूबर को मतगणना कराने के निर्देश दिए। सरकार की ओर से मतगणना में देरी के पक्ष में कई कारण अदालत के समक्ष रखे गए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मतगणना को और आगे टालने की अनुमति नहीं दी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 7 अक्टूबर को मतगणना कराई जाए। इस तरह सरकार को हाईकोर्ट से मिले तीन सप्ताह के समय के बजाय अब दो दिन के भीतर मतगणना कराने की व्यवस्था करनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतगणना के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल और अन्य सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। अदालत के निर्देश के बाद प्रशासन के सामने अब दो दिन के भीतर मतगणना की पूरी व्यवस्था करने की चुनौती है।किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका (जिसका नाम बोलचाल या टाइपिंग में लोग ‘सरिया कला’ भी लिख रहे हैं) के चुनाव की मतगणना को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत मतगणना कराने का आदेश दिया है।
इस मामले में कोर्ट के मुख्य फैसले और घटनाक्रम की जानकारी इस प्रकार है:

विवाद की वजह: इन दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया था। हालांकि, स्ट्रांग रूम के बाहर हुए राजनीतिक दलों के हंगामे और कानून व्यवस्था का हवाला देकर प्रशासन व राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना (काउंटिंग) को अगले आदेश तक के लिए टाल दिया था, जिसे प्रत्याशियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब प्रशासन को इसी हफ्ते बुधवार को मतों की गिनती करानी होगी और चुनाव के नतीजे साफ हो जाएंगे

तत्काल मतगणना का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को किच्छा और सिरौली कलां में बुधवार को ही तत्काल मतगणना शुरू करने और शुक्रवार तक इसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव: इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कानून व्यवस्था और हंगामे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को 3 सप्ताह के भीतर मतगणना कराने का समय दिया था। लेकिन प्रत्याशियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने 3 हफ्ते की ढील को खत्म कर तुरंत (इसी बुधवार को) मतगणना कराने की तारीख तय कर दी है।

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