नैनीताल:पश्चिम बंगाल भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय नवजागरण की पुण्यभूमिः राज्यपाल ✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ

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✅‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यमः राज्यपाल

नैनीताल 20 जून,
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    राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ अभियान के अंतर्गत पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों एवं पश्चिम बंगाल के नागरिकों को शुभकामनाएँ दीं।

  इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और यही विविधता राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं, वेशभूषाओं एवं परम्पराओं के बावजूद भारत की सांस्कृतिक आत्मा, राष्ट्रीय चेतना और साझा विरासत एक है। उन्होंने कहा कि हमारी सर्वाेच्च पहचान भारत माता के गौरवशाली नागरिक के रूप में है और यही भावना ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ की वास्तविक आत्मा है।

  राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारम्भ हुआ ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ अभियान देश के विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद, भावनात्मक एकता और राष्ट्रीय समरसता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि लोक भवन अब केवल प्रशासनिक संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जीवंत केन्द्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

  राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य आधुनिक भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक नवजागरण की अग्रणी भूमि रहा है। उन्होंने राजा राममोहन राय, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर, आचार्य जगदीश चन्द्र बोस, सत्येन्द्रनाथ बोस तथा सत्यजीत रे के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने भारतीय चिंतन और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई।

  राज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का उत्तराखण्ड के मायावती आश्रम से तथा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का रामगढ़ से जुड़ाव दोनों राज्यों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि बंगाल की वैचारिक चेतना और उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक ऊर्जा एक-दूसरे की पूरक हैं।

  स्वतंत्रता संग्राम में पश्चिम बंगाल के योगदान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ और ‘जन-गण-मन’ ने राष्ट्र की चेतना को नई दिशा दी, जबकि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है।

  राज्यपाल ने कहा कि प्रतिवर्ष पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए उत्तराखण्ड आते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा और उत्तराखण्ड की नन्दा राजजात यात्रा एवं महाकुम्भ जैसी परम्पराएँ सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता के सशक्त प्रतीक हैं।

  उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की समृद्ध हथकरघा एवं हस्तशिल्प परम्परा तथा उत्तराखण्ड के जैविक उत्पाद, औषधीय वनस्पतियाँ और प्राकृतिक संसाधन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने दोनों राज्यों की युवा शक्ति का आह्वान करते हुए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने का आग्रह किया।

  राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्यों की सीमाएँ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए होती हैं, हृदयों को विभाजित करने के लिए नहीं। उन्होंने सभी से विविधता में एकता की भारतीय परम्परा को आगे बढ़ाने तथा विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

   कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की संस्कृति, परम्पराओं, लोक कला एवं ऐतिहासिक विरासत पर आधारित विशेष प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं।  इस अवसर पर सचिव श्री राज्यपाल श्री रविनाथ रामन, विधि परामर्शी श्री कौशल किशोर शुक्ल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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