देहरादून: जाम से राहत का ‘डबल पार्किंग’ ब्लूप्रिंट, परेड ग्राउंड–गांधी पार्क के बीच बनेगी 390 वाहनों की अंडरग्राउंड पार्किंग,सचिवालय क्षेत्र में भी बनेगी 189 वाहनों की अंडरग्राउंड पार्किंग, 68 करोड़ की योजना पर मंथनसीएम धामी के निर्देश पर सचिवालय में पहली समीक्षा बैठक, ट्रैफिक प्रबंधन, लागत व कार्ययोजना पर गहन मंथन!! ashok gulati एडिटर इन चीफ

खबर शेयर करें -

देहरादून +राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस पहल शुरू कर दी है। सचिव, आवास विभाग, उत्तराखंड शासन की अध्यक्षता में 06 मई 2026 को सचिवालय में आयोजित बैठक में परेड ग्राउंड और गांधी पार्क के मध्य प्रस्तावित अंडरग्राउंड पार्किंग परियोजना का पीपीटी के माध्यम से विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया गया। बैठक में विभागीय अधिकारियों के साथ श्री आर.सी. शर्मा (प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग), श्री रणजीत सिंह (मुख्य अभियंता, लोनिवि, देहरादून), श्री ओमपाल सिंह (अधीक्षण अभियंता, 9वां वृत्त, लोनिवि, देहरादून) एवं श्री प्रवीण कुश (प्रोजेक्ट मैनेजर, पीआईयू, स्मार्ट सिटी, देहरादून) उपस्थित रहे।

6500 वर्ग मीटर में 60 करोड़ की लागत से विकसित होगी पार्किंग
लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तुत योजना के अनुसार परेड ग्राउंड और गांधी पार्क के मध्य लगभग 6500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में जी-1 स्तर की अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 60 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पार्किंग में लगभग 390 वाहनों को खड़ा करने की क्षमता होगी। परियोजना के क्रियान्वयन से राजपुर रोड, ऐस्ले हॉल, सचिवालय के सुभाष रोड और लैंसडाउन चौक के बीच सड़क किनारे खड़े वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग सुविधा मिल सकेगी, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या में राहत मिलने की उम्मीद है।

ट्रैफिक बाधित न हो, इसके लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना
बैठक में सचिव आवास द्वारा निर्देश दिए गए कि प्रस्तावित स्थल का स्वयं निरीक्षण किए जाने के उपरांत इस परियोजना पर पुनः विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी। साथ ही लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया कि अगली बैठक में ऐसी ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए, जिससे निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बाधित न हो। इसके लिए परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और एमडीडीए के साथ समन्वय बनाकर समग्र ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा।

एनओसी, इनफोर्समेंट प्लान और शुल्क निर्धारण पर जोर
परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा करना अनिवार्य होगा। लोक निर्माण विभाग द्वारा इनफोर्समेंट प्लान के साथ-साथ पार्किंग शुल्क का निर्धारण अन्य पार्किंग स्थलों के अनुरूप परीक्षण कर प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त संबंधित भूमि के संबंध में खेल विभाग एवं नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

सचिवालय क्षेत्र में दूसरी पार्किंग योजना पर भी मंथन
बैठक में राज्य सचिवालय के राजपुर रोड की ओर स्थित भूमि पर प्रस्तावित एक अन्य अंडरग्राउंड पार्किंग परियोजना का भी प्रस्तुतिकरण किया गया। इस परियोजना की अनुमानित लागत 68 करोड़ रुपये है, जिसमें 189 वाहनों की पार्किंग प्रस्तावित है। प्रति वाहन लगभग 35 लाख रुपये के व्यय प्रस्तावित होने पर सचिव आवास ने इस पर आपत्ति जताते हुए लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि परियोजना का पुनः परीक्षण किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि यह पार्किंग केवल सचिवालय कर्मियों के लिए होगी या आम जनता के उपयोग हेतु विकसित की जाएगी। इस संबंध में स्पष्ट प्रस्ताव के साथ अगली बैठक में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।

पर्यावरण संतुलन और आधुनिक शहरी प्रबंधन पर फोकस

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि परियोजना का निर्माण पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाए। हरित क्षेत्र, पारिस्थितिकी संतुलन और आधुनिक शहरी नियोजन को ध्यान में रखते हुए इस पार्किंग को एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

प्रथम चरण की समीक्षा, आगे होगी विस्तृत चर्चा
यह बैठक परियोजना के प्रारंभिक चरण की समीक्षा के रूप में आयोजित की गई थी। आगामी बैठकों में सभी संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों और स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर परियोजना के डिजाइन, लागत, संचालन मॉडल और समय-सीमा पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पर्यावरण संतुलन के साथ जल्द धरातल पर उतरेगी योजना – डॉ. आर. राजेश कुमार
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अंडरग्राउंड पार्किंग जैसी परियोजनाएं अत्यंत आवश्यक हो गई हैं। परेड ग्राउंड–गांधी पार्क क्षेत्र में प्रस्तावित यह पार्किंग शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भूमि से संबंधित सभी औपचारिकताओं, आवश्यक एनओसी, ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। साथ ही, सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर इस योजना को एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad