चंपावत:मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य की महिलाएँ बन रही हैं स्वरोजगार की मिसाल,पलायन पर प्रहार, स्वरोजगार की बहार: ‘चौहान फास्ट फूड’ से रचना चौहान ने लिखी सफलता की नई इबारत,राज्य सरकार की ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ से सशक्त होतीं ग्रामीण महिलाएँ: रचना चौहान ने दो अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार सपनों को मिली उड़ान! Ashok gulati एडिटर इन चीफ

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चम्पावत जिले के विकासखंड चम्पावत के अंतर्गत नौलापानी गाँव की निवासी श्रीमती रचना चौहान आज आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। बचपन से ही रचना को पाक कला में विशेष रुचि थी, किंतु धन के अभाव में वह अपना व्यवसाय शुरू करने में असमर्थ थीं और सीमित आय तथा घरेलू जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष कर रही थीं। ऐसे में उनके जीवन में परिवर्तन का मुख्य माध्यम ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ बनी, जिसे अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD) द्वारा वित्त पोषित और उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति (UGVS) द्वारा राज्य के विभिन्न जनपदों में संचालित किया जा रहा है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों की उद्यम आधारित आजीविका में वृद्धि करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करना है।

ग्रामोत्थान परियोजना के तहत ग्राम नौलापानी में आयोजित बैठकों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और लघु उद्यम स्थापना योजना की पूरी जानकारी दी गई, जिसके बाद मानक अनुसार रचना चौहान का चयन ‘चौहान फास्ट फूड रेस्टोरेंट’ के लिए किया गया।

इस उद्यम को स्थापित करने के लिए कुल 3 लाख रुपये की वित्तीय व्यवस्था की गई, जिसमें 75 हजार रुपये की अनुदान धनराशि, परियोजना के सहयोग से कराया गया डेढ़ लाख रुपये का बैंक ऋण तथा 75 हजार रुपये का लाभार्थी अंशदान शामिल था।

कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली रचना ने अपने पति के साथ मिलकर टनकपुर में इस फास्ट फूड रेस्टोरेंट का सफल संचालन शुरू किया।

आज उनके रेस्टोरेंट में नूडल्स, मोमोज, बर्गर, चाउमीन, सूप और अन्य फास्ट फूड व्यंजन स्थानीय युवाओं और छात्रों के बीच अत्यधिक पसंद किए जाते हैं। स्वादिष्ट भोजन और स्वच्छ माहौल के कारण उनकी पहचान आज एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी है।

स्वरोजगार शुरू करने के बाद उनके रेस्टोरेंट की प्रतिमाह लगभग डेढ़ लाख रुपये की बिक्री होती है, जिससे उन्हें लगभग 40 से 50 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती है।

रचना स्वयं यह मानती हैं कि ग्रामोत्थान परियोजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर दिया और अब वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं, बल्कि दो अन्य महिलाओं को भी अपने यहाँ रोजगार प्रदान कर रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए निरंतर समर्पित है।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है कि राज्य की मातृशक्ति को उनके अपने ही क्षेत्र और गाँव में स्वरोजगार के सुलभ अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, जिससे न केवल महिलाओं की आजीविका सुदृढ़ हो, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लग सके। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की महिला केंद्रित कल्याणकारी नीतियों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश के दुर्गम इलाकों की महिलाएँ भी स्वरोजगार से जुड़कर राज्य की विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रही हैं।

रचना चौहान की यह सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि मन में दृढ़ विश्वास और कड़ी मेहनत करने की लगन हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

‘ग्रामोत्थान परियोजना’ जैसी योजनाएँ धामी सरकार की सशक्त नीतियों के बल पर ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबन और समृद्धि की राह पर तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

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