
चंपावत : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप जनपद चम्पावत के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की वास्तविक अधिगम स्थिति को जानने तथा उनकी कमजोर दक्षताओं की पहचान कर उनमें सुधार लाने के उद्देश्य से दक्षता आधारित आकलन आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत कक्षा 2, 5 एवं 8 के विद्यार्थियों का भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों में उनकी कक्षा के अनुरूप दक्षताओं के आधार पर आकलन किया गया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी मान सिंह ने बताया कि दक्षता आधारित आकलन का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के अंक निर्धारित करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि बच्चों ने संबंधित विषयों की मूलभूत अवधारणाओं को कितना समझा है और किन क्षेत्रों में उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। आकलन के परिणामों के आधार पर प्रत्येक विद्यार्थी की कमजोर दक्षताओं की पहचान कर विद्यालय स्तर पर उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कक्षा 2 के विद्यार्थियों का भाषा एवं गणित में कुल 10 प्रश्नों के माध्यम से 10 अंकों का आकलन किया गया। कक्षा 5 में भाषा, गणित एवं पर्यावरण अध्ययन के कुल 15 प्रश्न तथा कक्षा 8 में भाषा, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के कुल 20 प्रश्न शामिल किए गए। प्रश्नों में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के साथ पठन-बोध को भी शामिल किया गया, ताकि विद्यार्थियों की समझ का वास्तविक स्तर सामने आ सके।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि आकलन के बाद 07 सितम्बर से 28 सितम्बर 2026 तक उपचारात्मक शिक्षण एवं विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। इसके बाद 28 सितम्बर 2026 को मध्यावधि आकलन के माध्यम से यह देखा जाएगा कि विद्यार्थियों की दक्षताओं में कितना सुधार हुआ है। विभाग द्वारा अधिगम स्तर में कम से कम 10 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को आकलन के परिणामों का गंभीरता से विश्लेषण करते हुए कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभिभावकों से बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और घर पर भी उन्हें अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा कि “सही आकलन से ही विद्यार्थी की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकता की पहचान संभव है। कमजोर दक्षताओं पर समय रहते विशेष ध्यान और उपचारात्मक शिक्षण देकर प्रत्येक बच्चे को सीखने में आगे बढ़ाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।”उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग का प्रयास है कि जनपद में कोई भी बच्चा अपेक्षित अधिगम स्तर से पीछे न रहे तथा विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों की शैक्षणिक नींव को मजबूत बनाएं।