खटीमा: गजब की कार्य शैली सीएम साहब की!मुख्यमंत्री धामी ने ‘लोकल फॉर वोकल’ को दिया प्रोत्साहन, लोहियाहेड में पैदल पहुंचकर स्थानीय स्टॉल पर लिया टिकी का स्वाद…!✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ एक्सक्लूसिव

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”..ऐसे ही नहीं गरीबों का मसीहा कहा जाता है, मुख्यमंत्री धामी को ; ठेले पर टिकिया खाते हुए, जनता जनार्दनक का कहना था मुख्यमंत्री हो तो धामी जैसा??

खटीमा : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को लोहियाहेड में ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को आत्मसात करते हुए स्थानीय व्यवसाय और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री पैदल चलते हुए आम लोगों के बीच पहुंचे और स्थानीय रूप से लोकप्रिय रवि के स्टॉल पर रुककर टिकी का स्वाद लिया।

मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप से पैदल चलते हुए देखकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने स्टॉल संचालक रवि से बातचीत कर उनके व्यवसाय के बारे में जानकारी ली और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका अर्जित करने के प्रयासों की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम अपने आसपास के स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिलता है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि आत्मनिर्भर समाज और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को भी गति मिलती है।

मुख्यमंत्री श्री धामी का स्थानीय लोगों के बीच इस सहज और आत्मीय अंदाज में पहुंचना क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री की सादगी तथा स्थानीय व्यवसायों के प्रति उनके प्रोत्साहन की सराहना की।

मुख्यमंत्री का यह कदम स्थानीय उद्यमियों के सम्मान, छोटे व्यवसायों के प्रोत्साहन और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में देखा गया।

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