


रानीखेत। रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर देवास आश्रम, चौकनी में रक्षाबंधन स्नेह उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देवास आश्रम के आसपास के क्षेत्रों की भारी सख्या में मातृशक्ति को आमंत्रित कर रक्षाबंधन पर्व को भक्ति, स्नेह और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवास आश्रम के डॉ. विजयशील उपाध्याय ने मातृशक्ति को सृजन शक्ति और राष्ट्र शक्ति बताते हुए कहा कि महिलाएं समाज और राष्ट्र की शक्ति का प्रमुख उद्गम हैं। उन्होंने महिलाओं की भूमिका को परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतुल अग्रवाल एवं श्री कैलाश पाण्डेय ने मातृशक्ति को रक्षाबंधन एवं स्नेह बंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को सफल, स्वावलंबी एवं नशामुक्त बनाने के लिए महिलाओं से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।
ग्राम प्रधान श्रीमती ममता बिष्ट ने देवास आश्रम द्वारा क्षेत्र की महिलाओं के स्वावलंबन के लिए संचालित गतिविधियों की सराहना करते हुए महिलाओं के हित में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विस्तार का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महिलाओं ने भक्ति भाव से भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उत्सव को यादगार बनाया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों को स्नेह बंधन बांधा गया। कार्यक्रम में शामिल 200 से अधिक मातृशक्ति को अतिथियों द्वारा स्नेह स्वरूप साड़ियां भेंट की गईं, जिससे महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
देवास आश्रम की मुख्य प्रशासिका श्रीमती वंदना उपाध्याय ने मातृशक्ति को रक्षाबंधन एवं स्नेह बंधन की शुभकामनाएं देते हुए आश्रम द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने देवास आश्रम द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा भी साझा की।
कार्यक्रम में श्री कमलेश जोशी, प्रधानाचार्य आर्मी पब्लिक स्कूल रानीखेत, रिटा. कैप्टन प्रमोद जोशी, श्री रघुवर सिंह मेहरा, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. अभिलाषा गुप्ता, डॉ. मोनाली, डॉ. शैलेंद्र डागर, डॉ. अभय गुप्ता, डॉ. जितेंद्र पपनोई, डॉ. प्रियंका रमोला एवं श्री दीपक खंडेलवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रक्षाबंधन स्नेह उत्सव ने पर्व की पारंपरिक भावना को सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के संदेश से जोड़ते हुए मातृशक्ति के प्रति सम्मान और आत्मीयता का संदेश दिया।