हल्द्वानी : सुल्ताननगरी गांव गौलापार में अखिल भारतीय किसान महासभा सुल्ताननगरी का इकाई सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें गांव की किसान कमेटी का गठन किया गया.
सम्मेलन का उद्घाटन भाषण करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी ने कहा कि, भाजपा सरकार नागरिकों के अधिकारों को सीमित कर रही है और उनके जीविका के मुख्य आधार कृषि और पशुपालन से बेदखल करने के लिए किसान-पशुपालक विरोधी कॉरपोरट पक्षधर नीतियां लाद रही है. इससे मुक्ति के लिए सभी मेहनतकश लोगों को एक होकर लड़ना होगा. वन भूमि पर बसी हुई आबादी को अपने मालिकाना अधिकार के लिए एकजुट होकर इस सरकार के विरुद्ध संघर्ष तेज करना ही एकमात्र विकल्प है.
माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, लालकुआं विधायक आजकल अपने बातों की हवाबाजी छोड़ने में व्यस्त हैं लेकिन जमीन पर काम शून्य है. वे उफनती गौला नदी में कूद पड़े कि नहीं ये तो पता नहीं लेकिन गौला पर पक्के तटबंध भाजपा के दस साल में अभी तक न बने, पूरी विधानसभा में सड़कों के गड्ढे उनको मुँह चिढ़ा रहे हैं. सुल्ताननगरी से लेकर बागजाला तक विधानसभा के वन भूमि पर बसे दर्जनों गांव राजस्व गांव बनने की प्रतीक्षा में हैं लेकिन विधायक जी अपनी पीठ खुद ही थपथपाने में व्यस्त हैं. यह जनता के प्रति उनकी बेरुखी और अपने बारे में झूठे आत्मप्रचार की उनकी प्रवृत्ति को दिखाता है.
सम्मेलन से 7 प्रस्ताव पारित किये गये जिसमें, भाजपा सरकार द्वारा 10 जुलाई को बिंदुखत्ता, बग्गा चौवन व बापू ग्राम को भूमिधरी अधिकार दिए जाने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक कर बनाई गई कमेटी में सुल्तान नगरी सहित सभी वन क्षेत्रों में बसे गांवों को भी सम्मिलित कर विधानसभा चुनाव से पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निर्वनीकरण का प्रस्ताव पारित कर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को भेज कर राजस्व गांव बनाने का मार्ग प्रशस्त करने; सुल्ताननगरी सहित वन क्षेत्र में बसे गांवों को जो पूर्व में पंचायत चुनाव में सम्मिलित थे उन्हें फिर से सम्मिलित करते हुए वोटर लिस्ट में ग्रामीणों का नाम दर्ज कर पंचायत चुनाव में भागीदारी करने का नागरिक अधिकार दिया जाए; सुल्ताननगरी में जल जीवन मिशन द्वारा खोदी गई सड़कों व गांव के अन्दर अन्य टूटी सड़कों, रास्तों को शीघ्र गड्ढा मुक्त करने के लिए मरम्मत कार्य शुरू किया जाए; सरकार की अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ने के खिलाफ तथा दशकों से वन भूमि में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने के लिए अखिल भारतीय किसान महासभा के साथ अन्य जनसंगठनों, किसान संगठनों के साथ मिलकर मोर्चा निर्माण करेगी तथा शीघ्र ही भूमि अधिकार सम्मेलन करते हुए राज्य में वन या सरकारी भूमि में रहने वालों के मालिकाना हक के साथ पंचायत चुनावों में भागीदारी करने, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन जनांदोलन शुरू किया जायेगा; अखिल भारतीय किसान महासभा सुल्तान नगरी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहकर कार्य करेगी; अखिल भारतीय किसान महासभा सुल्तान नगरी, किसानों – मजदूरों व मेहनतकश नागरिकों के शोषण के लिए बनी जन विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करेगी; अखिल भारतीय किसान महासभा सुल्तान नगरी दशकों से अपने जीवन की कमाई लगाकर वन भूमि या सरकारी जमीनों में रहने वालों को सरकार द्वारा अतिक्रमण के नाम पर बिना अन्यत्र व्यवस्था किए उजाड़ने की जन विरोधी नीति का पुरजोर विरोध करती है.
सम्मेलन से मालिकाना हक दिलाने, राजस्व गांव बनाये जाने, पंचायत चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करने, सड़क, बिजली, पानी आदि की समुचित व्यवस्था किये जाने की मांगों पर बड़े जनांदोलन का आगाज करने का आह्वान किया गया.
सम्मेलन से 17 सदस्यीय परिषद का चुनाव किया गया जिसने 7 सदस्यीय कार्यकारिणी का चयन किया जिसमें अध्यक्ष – बचे सिंह कपकोटी, उपाध्यक्ष – नायब सूबेदार बाली राम, सचिव – उर्मिला मौर्य, कोषाध्यक्ष – मीना आर्य, संगठन मंत्री – उत्तम राम, प्रचार मंत्री – दीवान राम चुने गए.
सम्मेलन में अखिल भारतीय किसान महासभा प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी, भाकपा माले जिला सचिव डा. कैलाश पाण्डेय, बचे सिंह कपकोटी,उर्मिला मौर्य, मीना आर्य, दीपा देवी, राधिका देवी, पदमा देवी, नंदी देवी, प्रेमा देवी, साबुली देवी, गोपाल राम, अमीर चंद्र, उत्तम राम, मदन राम, हरीश राम, गणेश राम, गुड्डू कुमार, आशा, कमल राम, सूरज कुमार, दीवान राम, दिनेश आर्य, उत्तम राम, संजय, मोहन राम, अमर राम, धर्मपाल, गौरी शंकर, बाबूराम, दीपा देवी, पंकज कपकोटी, तारा देवी, मीनाक्षी देवी, ममता देवी, लीला देवी, विमला देवी आदि शामिल रहे. सम्मेलन के पर्यवेक्षक किसान महासभा बागजाला कमेटी के प्रेम सिंह नयाल, दौलत सिंह कुंजवाल, दीवान सिंह बरगली मौजूद रहे.
सम्मेलन के अंत में नव निर्वाचित अध्यक्ष बचे सिंह कपकोटी ने सफल सम्मेलन के लिए सभी का धन्यवाद करते हुए मालिकाना अधिकार के लिए संयुक्त संघर्ष को तेज करने के आह्वान के साथ सम्मेलन का समापन किया.