चम्पावत मुख्यमंत्री के निर्देशों पर सड़क सुरक्षा अभियान तेज: एआरटीओ ने दी ‘गुड समेरिटन’ योजना की जानकारी, घायलों की मदद करने पर मिलेगा 25 हजार का इनाम! ✍️ashok gulati एडिटर इन चीफ

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चम्पावत 25 जून ।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर सड़क सुरक्षा अभियान तेज: एआरटीओ ने दी ‘गुड समेरिटन’ योजना की जानकारी, घायलों की मदद करने पर मिलेगा 25 हजार का इनाम

सड़क परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सड़क हादसों को रोकने के लिए लगातार दिए जा रहे निर्देशों के तहत चम्पावत जिले में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य मकसद सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को समय पर डॉक्टरी मदद पहुंचाना है, ताकि किसी की जान न जाए।

इसके साथ ही आम लोगों को बिना किसी डर के घायलों की मदद करने के लिए बढ़ावा देना है। इसी सिलसिले में केंद्र सरकार द्वारा लागू ‘गुड समेरिटन’ (यानी राह-वीर) कानून और योजना के बारे में जिले के लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशों पर एआरटीओ टनकपुर (चम्पावत) मनोज बगोरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘गुड समेरिटन’ या राह-वीर वह मददगार व्यक्ति होता है, जो बिना किसी लालच या इनाम की उम्मीद के, अपनी मर्जी से सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद करता है और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाता है।

इस कानून के तहत मदद करने वाले लोगों को पूरा कानूनी संरक्षण (सुरक्षा) दिया गया है। हादसे में घायल की मदद करने वाले व्यक्ति को पुलिस या कोर्ट-कचहरी के चक्करों में बिल्कुल नहीं उलझाया जाएगा। मदद करने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और पुलिस उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करेगी।

घायल को अस्पताल पहुंचाने के बाद मददगार व्यक्ति को वहां रुकने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

सरकार की इस योजना के तहत सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाने वाले मददगार (राह-वीर) को हर एक घटना के लिए 25,000 रुपये का नकद इनाम और एक तारीफ का सर्टिफिकेट दिया जाता है।

इसके अलावा, पूरे साल भर में देशभर से चुने गए सबसे बेहतरीन मददगारों को राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख रुपये तक के बड़े पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाता है।

एआरटीओ टनकपुर श्री मनोज बगोरिया ने सभी क्षेत्रवासियों से अपील की है कि सड़क हादसे के समय घायल व्यक्ति की मदद करने में बिल्कुल भी न हिचकिचाएं और न ही किसी बात का डर रखें, क्योंकि सरकार ने मददगारों को पूरी कानूनी सुरक्षा दी है।

उन्होंने बताया कि हादसे के तुरंत बाद का पहला एक घंटा (गोल्डन ऑवर) किसी भी घायल की जान बचाने के लिए सबसे कीमती समय होता है। इस बेहद जरूरी समय में अगर घायल को थोड़ी सी भी मदद मिल जाए, तो उसकी जान बच सकती है।

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