

मुख्य विकास अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं उप-शिक्षा अधिकारियों को रोस्टर के अनुसार विद्यालयों का नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए गए । उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह 15 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता, व्यवस्थाओं एवं शिक्षण कार्यों का समुचित आंकलन करना है।
उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित रोस्टर के अनुसार समयबद्ध एवं प्रभावी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाएजाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का प्रोत्साहन (Appreciation) अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए उनके छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना करना आवश्यक है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आगे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील (भोजन) की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि बच्चों को पोषक और स्वच्छ भोजन मिल सके। साथ ही शिक्षकों के व्यवहार का भी समय-समय पर मूल्यांकन किया जाए ताकि बच्चों के साथ सकारात्मक और सहयोगात्मक माहौल बना रहे। उन्होंने कहा कि ऐप के द्वारा डिजिटल माध्यम से कार्यों की निगरानी भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के समूह बनाए जाएंगे और उन्हें नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा, जिससे उनकी गतिविधियों और प्रगति पर नजर रखी जा सके।
इसके साथ ही कमजोर/जरूरतमंद विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त सहयोग और पढ़ाई में मदद दी जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement):कक्षा में विद्यार्थियों को फ्रंट से बैक रोटेशन के आधार पर बैठाया जाएगा, ताकि सभी को समान अवसर और ध्यान मिल सके।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि इसका लक्ष्य है,
हर विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना और उन्हें एक सुरक्षित, प्रेरणादायक एवं समावेशी वातावरण प्रदान करना।बैठक में मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल, जिला शिक्षा अधिकारी सभी खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी आदि उपस्थित रहे।