बिग ब्रेकिंग केदारनाथ धाम::अब पहाड़ का पानी और जवानी दोनों काम आएंगे;’मुझे विश्वास है कि जितनी ऊंचाइयों पर उत्तराखंड बसा है उससे भी अधिक ऊंचाई को उत्तराखंड हासिल करके रहेगा; कहा जाता है कि पहाड़ का पानी और जवानी उसके काम नहीं आता है? लेकिन अब पहाड़ का पानी और जवानी दोनों यहां के काम आएंगे! पुष्कर सिंह धामी सीएम की पीठ थपथपा गए नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री @

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केदारनाथ धाम (अशोक गुलाटी देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल हेड) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केदारनाथ धाम में की 12 फीट लंबी और 35 टन वजन वाली प्रतिमा लगाई गई है। प्रधानमंत्री 2013 की प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त हुए शंकराचार्य की समाधि स्थल का लोकार्पण किया। केदारनाथ में पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत की जाति पंथ की सीमाओं से बाहर देखने की शंकाओं-आशंकाओं से ऊपर उठने की मानव जाति को जरूरत थी तब समाज में आदि शंकराचार्य ने चेतना फूंकी। उन्होंने तब कहा कि नाश-विनाश की शंकाएं,जाति-पाति के भेद से हमारी परंपरा का कोई लेना-देना नहीं है। आदि शंकर ने कहा कि आनंद स्वरूप शिव हमीं हैं। जीवत्व से ही शिवत्व है। समय के दायरे में बंधकर भारत को अब भयभीत होने की जरूरतआदि शंकराचार्य ने भारत की चेतना में फिर से प्राण फूंके-PMविद्वानों ने कहा है ‘शंकरो शंकर: साक्षात’। अर्थात आदि शंकराचार्य भगवान शंकर का साक्षात रूप थे। बाल उम्र से ही शास्त्रों, ज्ञान, विज्ञान का निरंतर चिंतन उन्होंने किया। ये शंकर के भीतर साक्षात शंकरत्व का जागरण था। यहां संस्कृति एवं वेदों के बड़े-बड़े पंडित यहां बैठे हैं। शंकर का संस्कृत में अर्थ जो कल्याण करे वही शंकर है। इस कल्याण को भी आचार्य शंकर ने प्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित कर दिया। उनका पूरा जीवन जितना असाधारण था उतना ही वह जनकल्याण के लिए समर्पित थे। भारत और विश्व के कल्याण के लिए वह अपनी चेतना समर्पित करते रहते थे। भारत जब अपनी एकजुटता को खो रहा था तब शंकराचार्य जी ने कहा था कि राग-द्वेष, लोभ-मोह, ईर्ष्या-अहम ये सब हमारा स्वभाव नहीं है। जब भारत की जाति पंथ की सीमाओं से बाहर देखने की शंकाओं-आशंकाओं से ऊपर उठने की मानव जाति को जरूरत थी तब समाज में उन्होंने चेतना फूंकी। उन्होंने तब कहा कि नाश-विनाश की शंकाएं, जाति-पाति के भेद से हमारी परंपरा का कोई लेना-देना नहीं है। आदि शंकर ने कहा कि आनंद स्वरूप शिव हमीं हैं। जीवत्व से ही शिवत्व है। अद्वैत का सिद्धांत जहां द्वैत नहीं वहीं तो अद्वैत है। शंकराचार्य ने भारत की चेतना में फिर से प्राण फूंके। हमें आर्थिक, परमार्थिक उन्नति का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि दुख, कष्ट और कठिनाइयों से मुक्ति का एक ही मार्ग है, वह ज्ञान है। आदि शंकराचार्य ने भारतीय ज्ञान-मीमांसा में फिर से ज्ञान बढ़ाया है/

‘विकास कार्यों की हकदार ईश्वर की कृपा है’
पीएम ने कहा-वर्षों पहले मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था लेकिन मैं अपने आप को रोक नहीं पाया था। त्रासदी के समय मैं यहां दौड़ा चला आया। साल 2013 की उस तबाही को मैंने देखा, उस दर्द को मैंने देखा। मेरे भीतर की आवाज कह रही थी कि पहले से अधिक आन-बान और शान से केदारनाथ खड़ा होगा। मेरा यह विश्वास बाबा केदार के कारण, आदि शंकराचार्य की तपस्या के कारण था। मुझे कच्छ को खड़ा करने का अनुभव था। यह संकल्प साकार हुआ है। यह देखने का मुझे सौभाग्य मिला है। इस पवित्र धरती ने कभी मुझे पाला पोसा था उसकी सेवा करने का सौभाग्य मिलना इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य क्या होगा। इस भूमि पर आधुनिकता का मले, विकास के ये कार्य भगवान शिव की कृपा का परिणाम है। ईश्वर कृपा ही इसकी हकदार है। मैं इन पुनीत प्रयासों के लिए उत्तराखंड सरकार का, सीएम धामी जी का, इन कार्यों की जिम्मेदारी उठाने वाले सभी लोगों का आज हृदय से आभार देता हूं। मुझे पता है कि यहां बर्फबारी के बीच भी किस तरह काम करना पड़ता है।

केदारनाथ में लोगों को संबोधित कर रहे पीएम मोदी
केदारनाथ धाम में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश इतना विशाल है, इतनी महान ऋषि परंपरा है। एक से बढ़कर एक तपस्वी आज भी भारत के हर कोने में आध्यात्मिक चेतना को जगाते रहते हैं। ऐसे संत आज हमारे साथ जुड़े हुए हैं। मैं इन सभी संतों को आदर पूर्वक प्रणाम करता हूं। इनके आशीर्वाद हमें शक्ति देंगे, इसका मुझे भरोसा है। हमारी उपनिषदों में आदि शंकराचार्य जी की रचनाओं में ‘नेति नेति’ कहकर एक विश्व भाव का विस्तार किया गया है। रामचरित मानस में भी इस बात को अलग तरह से दोहराया गया है। ‘अविगत अकथ अपार’ अर्थात कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता हैं। मैं यहां जब भी आता हूं तो यहां के कण-कण से मैं जुड़ जाता हूं। इसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। दीपावली के मौके पर मैं सीमा पर अपने सैनिकों के साथ था, आज मैं सैनिकों की भूमि पर हूं। त्योहारों की खुशियां मैंने जवानों के साथ बांटी हैं। देशवासियों के प्रति उनका प्रेम और श्रद्धा को लेकर मैं उनके बीच गया। गुजरात के लोगों के लिए आज नया वर्ष है। आज केदारनाथ में मुझे बाबा का दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। उत्तराखंड के संदर्भ में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा’अब पहाड़ का पानी और जवानी दोनों काम आएंगे’मुझे विश्वास है कि जितनी ऊंचाइयों पर उत्तराखंड बसा है उससे भी अधिक ऊंचाई को उत्तराखंड हासिल करके रहेगा। कहा जाता है कि पहाड़ का पानी और जवानी उसके काम नहीं आता है लेकिन अब पहाड़ का पानी और जवानी दोनों यहां के काम आएंगे। बाबा केदार के आशीर्वाद के साथ हम आगे बढ़ें, देश को नई ऊंचाई पर ले जाने का हम संकल्प करें। मैं आप सभी को दिवाली, छठ पूजा एवं पर्वों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

चारो धाम राजमार्ग से जुड़ेंगे-पीएम
आजादी के अमृत महोत्सव में हमें अपनी हजारों सालों की परंपरा को अनुभूति करने का समय है। गुलामी के कालखंड में हमारी महान चेतना ने हमें बांधकर रखा। एक नागरिक के तौर पर हमें पवित्र स्थानों का दर्शन करने के लिए जाना चाहिए। हमें स्थानों की महिमा जाननी चाहिए। चार धाम सड़क परियोजना पर तेजी से काम रहा है। चारो धाम राजमार्ग से जुड़ रहे हैं। केदारनाथ में आने वाले समय में श्रद्धालु कार से भी आ सकेंगे। हेमकुंड साहिब में रोपवे बनाने की तैयारी चल रही है। ऋषिकेश और कर्ण प्रयाग को रेल से जोड़ने पर काम चल रहा है। इससे उत्तराखंड के पर्यटन को बहुत लाभ होने वाला है। 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का होने वाला है।केदरानाथ में 130 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं का उद्घाटनपीएम ने केदरानाथ में 130 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं का उद्घाटन किया।मेरे साथ बोलिए-जय केदार, जय केदार, जय केदार। इससे पूर्व प्रधानमंत्री के पहुंचने पर राज्यपाल मुख्यमंत्री ने स्वागत किया और मुख्यमंत्री ने संबोधित किया अब तक के हुए विकास कार्य की योजनाओं के संदर्भ में बताया गया।

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