रानीखेत: सैन्य सुरक्षा के साथ का पर्यटन विकास कैसे संभव? चिलियानौला मॉडल और इको-टूरिज्म से बदलेगी सूरत! संदीप पाठक की रिपोर्ट [एक्सक्लूसिव]

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रानीखेत। सैन्य छावनी क्षेत्र होने के कारण रानीखेत को पूर्ण पर्यटक नगरी के रूप में विकसित करने की राह में सुरक्षा नियमों की जो पाबंदियां आड़े आती रही हैं, उनका व्यावहारिक समाधान अब प्रशासनिक पुनर्गठन और नियंत्रित पर्यटन नीतियों में दिखने लगा है। पूर्व सैन्य कमांडेंट ब्रिगेडियर संजय कुमार यादव के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने रानीखेत को पूर्ण पर्यटक नगरी के रूप में विकसित करने में छावनी नियमों की सीमाओं का हवाला दिया था, अब नागरिक क्षेत्रों में विकास की एक नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना की सुरक्षा और गोपनीयता से समझौता किए बिना भी रानीखेत को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र और नागरिक नगरपालिका का रूप दिया जा सकता है।

सिविल एरिया का चिलियानौला नगरपालिका में विलय: योल मॉडल की राह

रानीखेत के नागरिक क्षेत्रों (जैसे सदर बाजार और जरूरी बाजार) को लोकतांत्रिक अधिकार और बेहतर विकास बजट दिलाने के लिए हिमाचल प्रदेश के ‘योल छावनी मॉडल’ की तर्ज पर कदम उठाए जा सकते हैं। इसके तहत सैन्य छावनी के नागरिक क्षेत्रों को मिलिट्री स्टेशन से अलग (Excise) करके चिलियानौला नगरपालिका में शामिल किया जा सकता है। इससे एक बड़ी और एकीकृत नगरपालिका का मार्ग प्रशस्त होगा। नागरिक क्षेत्रों के अलग होने से जहां आम जनता को शहरी विकास की सभी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा, वहीं सेना के आंतरिक सुरक्षा क्षेत्रों की संवेदनशीलता और अनुशासन भी पूरी तरह अक्षुण्ण रहेगा।

[मानसखंड मिशन और इको-टूरिज्म से बढ़ेगा रोजगार

रानीखेत को किसी अन्य कमर्शियल हिल स्टेशन की तरह अनियंत्रित भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बनाने के बजाय ‘नियंत्रित और थीम-बेस्ड पर्यटन’ (Controlled & Thematic Tourism) की ओर ले जाने की आवश्यकता है। उत्तराखंड सरकार के मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत कुमाऊं के प्राचीन धार्मिक सर्किट में रानीखेत को एक मुख्य पड़ाव के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, सैन्य वन क्षेत्रों की प्राकृतिक शांति को बनाए रखते हुए केवल ‘नेचर ट्रेल्स’, ‘बर्ड वाचिंग’ और ‘ट्रेकिंग रूट्स’ को बढ़ावा दिया जाए, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना साहसिक पर्यटन को गति मिले।

[ड्रेनेज आधुनिकीकरण और वेलनेस हब पर जोर

रानीखेत की भौगोलिक और प्राकृतिक विशिष्टताओं को संवारने के लिए बुनियादी ढांचे में बड़े सुधारों की आवश्यकता है:

  • वैज्ञानिक जल निकासी व्यवस्था: अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही पारंपरिक ड्रेनेज प्रणाली का आधुनिक तकनीक से सुदृढ़ीकरण किया जाए और अत्याधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित हों।
  • झील और जल स्रोतों का संरक्षण: स्थानीय रानीझील और पारंपरिक नौले-धारों का सौंदर्यीकरण कर उन्हें पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाया जाए।
  • आयुर्वेद और वेलनेस टूरिज्म: रानीखेत की प्रसिद्ध कोऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री के आधुनिकीकरण के साथ यहां एक उन्नत वेलनेस और योग केंद्र स्थापित कर इसे वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य पर्यटन (Health Tourism) के मानचित्र पर उभारा जा सकता है।
    निष्कर्ष:
    सैन्य प्रशासन की सुरक्षा संबंधी चिंताएं अपनी जगह बिल्कुल जायज हैं, लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ नागरिक क्षेत्रों का चिलियानौला में विलय करके और वेलनेस व इको-टूरिज्म पर ध्यान केंद्रित करके रानीखेत के विकास का एक नया अध्याय लिखा जा सकता है। इससे जहां स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं सेना की गरिमा और सुरक्षा भी अभेद्य बनी रहेगी।
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