
रानीखेत। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन पंत ने सनातन त्योहारों के ऐन वक्त पर खाद्य सुरक्षा और अन्य नियमों के नाम पर स्थानीय व्यापारियों व आम जनता के खिलाफ होने वाली ‘चुनिंदा’ प्रशासनिक कार्रवाइयों पर तीखा और व्यंग्यात्मक प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के नियमों के विरुद्ध बिल्कुल नहीं है, लेकिन इसकी आड़ में केवल सनातनी त्योहारों के समय ही व्यापारियों को प्रताड़ित करना कतई न्यायसंगत नहीं है। क्या सरकारी अमले को बाकी पूरे साल नियमों की याद नहीं आती?
विहिप जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन पंत ने तंज कसते हुए कहा कि यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि जैसे ही हिंदुओं के त्योहार नजदीक आते हैं, प्रशासन को अचानक दुकानों में कमियां और मिलावट दिखने लगती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्सव के ठीक पहले व्यापारियों का चालान काटना और जनता को परेशान करना एक रूटीन बन गया है, जो त्योहारों के रंग को फीका करने की सोची-समझी कोशिश जैसा प्रतीत होता है। सनातन परंपराओं को जीवित रखने का दम भरने वाली सरकार के राज में इस तरह की ‘टारगेटेड’ कार्रवाई समझ से परे है।
मामले में दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां स्थानीय सनातनी व्यापारियों को नियमों के जाल में उलझाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ गैर-सनातन धर्मों के त्योहारों या आम दिनों में बाहरी राज्यों से आए विशेष समुदाय के लोग धड़ल्ले से बाजार में बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी खाद्य जांच के सामान बेचकर चांदी काट जाते हैं। उस समय प्रशासन की यह कथित मुस्तैदी और नियम-कायदों की पोटली न जाने कहां गायब हो जाती है।
पंत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नियमों का पालन करवाना सही है, परंतु किसी भी बहाने से बहुसंख्यक समाज के त्योहारों को ही निशाना बनाने और स्थानीय व्यापारियों का उत्पीड़न करने की इस परिपाटी को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को अपनी इस पक्षपातपूर्ण और संवेदनहीन कार्यशैली को तुरंत छोड़ना होगा, अन्यथा संगठन चुप नहीं बैठेगा।

