देहरादून:उत्तराखंड में 6.5 तीव्रता (Magnitude) का भूकंप काफी विनाशकारी और खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने पूरे राज्य को सीस्मिक ज़ोन 6 (Seismic Zone 6) यानी भूकंप के लिहाज़ से सबसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में रखा है?✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ/संदीप पाठक ब्यूरो चीफ एक्सक्लूसिव

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इस तीव्रता के भूकंप से उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में निम्नलिखित स्तर का नुकसान हो सकता है..

  1. इमारतों और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को नुकसान
  • कच्चे और पुराने मकान: गांवों में बने पत्थरों और मिट्टी के पारंपरिक मकान या बिना कंक्रीट (Unreinforced) वाले पुराने घर पूरी तरह ढह सकते हैं.
  • शहरी इमारतें: देहरादूत, हल्द्वानी, हरिद्वार जैसे घनी आबादी वाले शहरों में अगर बहुमंजिला इमारतें भूकंप-रोधी (Earthquake-resistant) मानकों के बिना बनी हैं, तो उनमें बड़ी दरारें आ सकती हैं या वे गिर सकती हैं.
  • आपातकालीन सेवाएं: एक सरकारी अध्ययन (DMMC) के अनुसार, राज्य के लगभग 80% आपातकालीन बुनियादी ढांचे (जैसे पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन और प्रशासनिक भवन) इस तरह के बड़े झटके से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं.
  1. भूस्खलन (Landslides) और रास्तों का बंद होना
  • उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है। 6.5 तीव्रता का झटका पहाड़ों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन और चट्टानें खिसकने (Rockfalls) की घटनाएं पैदा करेगा.
  • आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप जनित भूस्खलन के मामले में रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं.
  • मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और चारधाम यात्रा मार्ग मलबे के कारण पूरी तरह ब्लॉक हो सकते हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य (Rescue Operations) में भारी बाधा आ सकती है.
  1. जनजीवन और जान-माल की हानि (Fatalities)
  • इतिहास गवाह है कि उत्तराखंड (उत्तरकाशी) में साल 1991 में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप में 768 लोगों की जान गई थी और करीब 18,000 घर तबाह हो गए थे. इसी तरह 1999 में चमोली में 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था.
  • अगर भूकंप का केंद्र (Epicenter) जमीन के बहुत पास (Shallow depth) हुआ, तो जनहानि का आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है.
  1. नदियों और बांधों (Dams) पर असर
  • पहाड़ों में भूस्खलन के कारण नदियों का रास्ता रुक सकता है, जिससे अस्थायी झीलें बन सकती हैं और बाद में अचानक बाढ़ (Flash Floods) का खतरा पैदा हो सकता है.
  • हालांकि राज्य के बड़े बांधों (जैसे टिहरी बांध) को उच्च तीव्रता के भूकंप झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन उनके आसपास की पहाड़ियों और जलभराव क्षेत्रों में हलचल का खतरा बढ़ जाता है.
    नुकसान किस बात पर निर्भर करता है?
    भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, वास्तविक नुकसान केवल तीव्रता पर नहीं बल्कि इन 3 मुख्य कारकों पर निर्भर करेगा:
  1. फोकस की गहराई (Depth): यदि भूकंप जमीन से 30-40 किमी नीचे आता है, तो नुकसान कम होता है. यदि यह सतह के पास (10 किमी या उससे कम) हुआ, तो तबाही मर्चेंट स्केल पर बहुत भयानक होगी.
  2. समय (Timing): यदि भूकंप रात के समय आता है जब लोग घरों के अंदर सो रहे होते हैं, तो जनहानि की आशंका सबसे अधिक होती है.
  3. निर्माण की गुणवत्ता: भूकंप कभी लोगों की जान नहीं लेता, बल्कि असुरक्षित इमारतें लेती हैं.|
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