
चंपावत 21 अगस्त ।
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के सशक्त महिला-आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार कर रही ‘रीप’ योजना, बाराकोट की आशा देवी ने अपने पैतृक व्यवसाय को दिया नया आयाम
स्वरोजगार से पलायन पर प्रहार: रीप योजना से बाराकोट की आशा देवी ने स्थापित की मिसाल
पारंपरिक हुनर को मिला सरकारी योजनाओं का संबल: आशा देवी ने पैतृक व्यवसाय को आधुनिक रूप देकर बढ़ाई अपनी आय
प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री के “सशक्त महिला, समृद्ध उत्तराखंड” के विजन को धरातल पर उतारने में ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (REAP) अत्यंत कारगर सिद्ध हो रही है।
इसी क्रम में विकासखंड बाराकोट के सुदूर ग्राम काकड़ खतेड़ी की श्रीमती आशा देवी ने रीप योजना के माध्यम से अपने पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक रूप देकर सफलता की एक नई कहानी लिखी है।
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) के तहत गठित ‘जय एड़ी बाबा स्वयं सहायता समूह’ एवं ‘लड़ीधुरा आजीविका महिला स्वायत्त सहकारिता’ से जुड़ी श्रीमती आशा देवी का परिवार वर्षों से पारंपरिक लोहार व्यवसाय से जुड़ा था। पर्याप्त संसाधनों एवं वित्तीय सहयोग के अभाव में यह व्यवसाय सीमित दायरे तक ही सिमटा हुआ था।
मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा से ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आजीविका संवर्धन अभियानों के दौरान उन्हें रीप योजना की जानकारी मिली, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अपने पैतृक कार्य को बड़े स्तर पर शुरू करने का संकल्प लिया।
परियोजना द्वारा भौतिक सत्यापन के उपरांत श्रीमती आशा देवी को उद्यम स्थापना हेतु कुल स्वीकृत धनराशि में से 30 प्रतिशत (₹30,000) अनुदान सहायता के रूप में प्रदान किया गया, जबकि 50 प्रतिशत (₹50,000) बैंक ऋण तथा 20 प्रतिशत (₹20,000) लाभार्थी अंशदान के रूप में समायोजित किया गया। इस वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने अपने पति श्री कुँवर लाल के साथ मिलकर आधुनिक औजारों एवं बर्तनों का निर्माण शुरू किया। आज इस लघु उद्यम के माध्यम से वे प्रतिमाह ₹5,000 से ₹6,000 तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
श्रीमती आशा देवी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को घर पर ही स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही हैं, बल्कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हो रही है।