
चंपावत +प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के युवाओं को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने के दूरदर्शी विजन के अनुरूप, उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
इसके तहत एनसीवीटी (NCVT) मान्यता प्राप्त राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में शैक्षणिक सत्र के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रभारी अधिकारी जिला कार्यालय श्री कमल चंद्र तिवारी ने बताया कि कौशल विकास एवं सेवायोजन निदेशालय के पत्र के क्रम में, क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (CTS) के अंतर्गत विभिन्न व्यवसायों में प्रवेश हेतु शैक्षणिक अर्हता (आठवीं व दसवीं उत्तीर्ण) के आधार पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया गतिमान है।
विभाग द्वारा प्रदेश के सभी 93 एनसीवीटी मान्यता प्राप्त राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश की यह प्रक्रिया आगामी 30 अगस्त 2026 तक संचालित रहेगी।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों और संसाधनों के अनुरूप रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार यह बेहद आवश्यक है कि युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता एवं रुचि के अनुसार विभिन्न तकनीकी व्यवसायों में गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
इस प्रशिक्षण को प्राप्त कर युवा न केवल प्रदेश की भौगोलिक इकाइयों में, बल्कि देश के अन्य राज्यों और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध रोजगार तथा स्वरोजगार के बेहतरीन अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।
युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने का यह महत्वपूर्ण कार्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से पूरी तत्परता से संपादित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि संस्थानों में उपलब्ध आधुनिक आधारभूत सुविधाओं एवं उच्च स्तरीय प्रशिक्षण क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण उपलब्ध सीटों के सापेक्ष अपेक्षित संख्या में प्रवेश नहीं हो पा रहे थे।
इस स्थिति को सुधारने के लिए जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार के निर्देशों के क्रम में अब जनपद में संचालित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की उपलब्ध क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा जनपद के संस्थानों में उपलब्ध प्रत्येक सीट पर प्रवेश सुनिश्चित करने हेतु समुचित और व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि चम्पावत के अधिक से अधिक युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध हो सके और वे आत्मनिर्भर बनते हुए जनपद व प्रदेश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में अपना प्रभावी योगदान दे सकें।