रानीखेत: जिला घोषित करने की मांग तेज: क्षेत्रीय विकास मोर्चा ने सीएम धामी को भेजा ज्ञापन, दी चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी! संदीप पाठक की रिपोर्ट

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रानीखेत (उत्तराखंड)। राज्य स्थापना दिवस (09 नवम्बर) के अवसर पर रानीखेत को जिला घोषित करने की ऐतिहासिक मांग एक बार फिर गरमा गई है। क्षेत्रीय विकास मोर्चा, उपमंडल रानीखेत के बैनर तले क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और आंदोलनकारियों ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन में रानीखेत के ऐतिहासिक महत्व, भौगोलिक विशालता और प्रशासनिक आवश्यकताओं का हवाला देते हुए इसे अविलंब जिला बनाने की पुरजोर वकालत की गई है।
इसके साथ ही क्षेत्र की जनता ने राजनीतिक दलों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी रानीखेत की उपेक्षा हुई, तो आगामी चुनावों में दोनों प्रमुख दलों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत दावा

क्षेत्रीय विकास मोर्चा ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि रानीखेत उपमंडल उत्तराखंड राज्य की सबसे बड़ी तहसील है, जिसका ब्रिटिश काल से ही अपना एक विशिष्ट ऐतिहासिक महत्व रहा है। आजादी से पूर्व यहाँ आई.सी.एस. और आजादी के बाद आई.ए.एस. अधिकारियों की तैनाती संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में होती आई है।
ज्ञापन के अनुसार, रानीखेत जिला गठन का मामला नया नहीं है:

  • 1955: रानीखेत को जिला बनाने की मांग पहली बार जनता द्वारा उठाई गई थी।
  • 1985-86: तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में राजस्व मंत्री श्री बलदेव सिंह ने इस मांग को जायज माना था, लेकिन आर्थिक तंगी का हवाला दिया। इसके बाद 1986 में राजस्व परिषद ने इसकी प्रबल संस्तुति की, जिसे वेंकटरमाणी आयोग और वित्त आयोग ने भी सहमति दी थी।
  • 1994: तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रानीखेत को जिला बनाना स्वीकार करते हुए यहाँ ए.डी.एम. (ADM) और ए.एस.पी. (ASP) की नियुक्तियां तो कर दीं, लेकिन उप-चुनाव के चलते औपचारिक घोषणा नहीं हो सकी।
  • 1997: मायावती सरकार द्वारा सूबे में 3 नए जिलों की घोषणा के दौरान भी रानीखेत उपमंडल की घोर उपेक्षा की गई।

सभी बुनियादी सुविधाएं और जिला स्तरीय कार्यालय पहले से मौजूद

मोर्चा ने तर्क दिया है कि 137,322.786 हेक्टेयर में फैले इस विशाल उपमंडल में जिला बनने के सभी मानक पहले से पूरे हैं। यहाँ कुमाऊं रेजीमेंट (KRC) और एसएसबी (SSB) का मुख्यालय स्थित है। आजादी के बाद से यहाँ उद्यान निदेशालय और ब्रिटिश काल से देश का दूसरा बड़ा जी.पी.ओ. (GPO) कार्यरत है।
इसके अतिरिक्त विद्युत, लोक निर्माण (PWD), सिंचाई, भूमि संरक्षण, वन विभाग, रोडवेज, police और चिकित्सालय के जिला स्तरीय कार्यालय पहले से निर्मित हैं। जिला जज व अन्य न्यायिक अधिकारियों, श्रम, आयकर और वाणिज्य कर विभागों के शिविर यहाँ नियमित रूप से लगते हैं। भाजपा ने भी इसे सांगठनिक दृष्टि से और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) व व्यापार मंडल ने इसे जिला इकाई के रूप में मान्यता दे रखी है। तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी इसे जिला बनाने का आश्वासन दिया था। सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ राज्य सरकार के पास प्रचुर मात्रा में भूमि उपलब्ध है, जिससे सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

“नेताओं का ‘लॉलीपॉप’ अब नहीं चलेगा, विधायक और पूर्व विधायक आएं साथ”

इस आंदोलन के बीच रानीखेत की जनता का आक्रोश अब सातवें आसमान पर है। मोर्चा और स्थानीय नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए सख्त लहजे में कहा है कि नेता हर चुनाव में रानीखेत को जिला बनाने का जो ‘लॉलीपॉप’ थमाते आए हैं, उसे अब तुरंत बंद करें। जनता अब खोखले वादों के झांसे में आने वाली नहीं है। नेता इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे को पूरी गंभीरता से लें, अन्यथा आने वाले समय में इसके परिणाम किसी भी दल के लिए सुखद नहीं होंगे।
जनता ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि वर्तमान स्थानीय विधायक और पूर्व विधायक, दोनों को आपसी राजनीतिक मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना होगा और रानीखेत को जिला बनाने के लिए जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना पड़ेगा। चुनाव से पहले दोनों दलों को अपने घोषणापत्र और नीतियों में रानीखेत जिला गठन को प्राथमिकता देनी होगी, अन्यथा चुनावी मैदान में उन्हें जनता के तीखे विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। यदि इस बार भी टालमटोल की गई, तो आगामी विधानसभा चुनाव में जनता वोट की चोट से इसका करारा जवाब देगी।

ज्ञापन सौंपने वालों में ये रहे शामिल

संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने वालों में नामित सदस्य मोहन नेगी, अधिवक्ता दिनेश तिवारी, राज पांडेय, खजान पांडेय, आशीष पांडेय, शंकर दत्त बुधोड़ी, सुनील कुमार, भूपाल, महेश पांडेय, नवीन उपाध्याय और मनोहर लाल चौधरी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग मुख्य रूप से शामिल रहे।

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