चंपावत:मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में दुग्ध उपार्जन में उल्लेखनीय वृद्धि, चम्पावत में पशुपालकों की समृद्धि और रिवर्स पलायन की नई मिसाल!✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ

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सहकारिता और स्वरोजगार से समृद्धि: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बढ़ा दुग्ध संग्रह, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती

चंपावत : प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप राज्य में डेयरी विकास एवं पशुपालन के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की जा रही है।

इसी क्रम में चम्पावत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (आँचल) ने दुग्ध उपार्जन में अभूतपूर्व वृद्धि हासिल करते हुए राज्य में पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि और रिवर्स पलायन का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा स्वरोजगार एवं सहकारिता को दिए जा रहे निरंतर प्रोत्साहन से चम्पावत जिले में दुग्ध उपार्जन गत वर्ष के 18,000 लीटर प्रतिदिन से बढ़कर वर्तमान में 21,000 लीटर प्रतिदिन पहुंच गया है। प्रतिदिन औसतन 3,000 लीटर यानी 16.7 प्रतिशत की इस उल्लेखनीय वृद्धि से जिले के 5,533 से अधिक दुग्ध उत्पादक पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।

सरकार की स्वरोजगार योजनाओं की प्रेरणा से पर्वतीय क्षेत्रों में रिवर्स पलायन की एक आदर्श मिसाल कायम हो रही है। विकास खंड लोहाघाट के ग्राम बुंगाफर्त्याल निवासी श्री राकेश उपाध्याय ने दिल्ली की प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपने गाँव लौटकर 60 नाली पुस्तैनी भूमि पर डेयरी उद्योग शुरू किया। आज वे 20 दुधारू पशुओं के साथ प्रतिदिन 80 से 90 लीटर दूध दुग्ध समिति को आपूर्ति कर प्रतिमाह लगभग 1,00,000 रुपये की अनुमानित आय अर्जित कर रहे हैं।

इसी प्रकार ग्राम चांचड़ी की श्रीमती मुन्नी देवी ने वर्ष 2020-21 में एनसीडीसी योजना के अंतर्गत 3 पशुओं से शुरुआत कर आज 15-16 पशुओं के माध्यम से प्रतिदिन 55 से 60 लीटर दूध आपूर्ति कर लगभग 70,000 रुपये प्रतिमाह की आय के साथ अपने परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।

दुग्ध संघ चम्पावत द्वारा पशुपालकों को गुणवत्तायुक्त पशुआहार, भूसा, साइलेज, मिनरल मिक्सचर, आकस्मिक पशुचिकित्सा सुविधा तथा हरा चारा बीज जैसी आवश्यक सेवाएँ निरंतर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जिले की दुधपोखरा आदर्श दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति जैसे प्रयास, जहाँ 200 सदस्य मिलकर प्रतिदिन 750 से 800 लीटर दूध का संकलन कर रहे हैं, यह सिद्ध करते हैं कि राज्य सरकार के प्रोत्साहन, समयबद्ध भुगतान और सहकारिता की शक्ति से सीमांत क्षेत्रों के पशुपालक आर्थिक स्थिरता और खुशहाली की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने कहा कि दुग्ध संघ और पशुपालन विभाग के परस्पर समन्वय तथा सहकारी समितियों के सक्रिय सहयोग से जनपद में दूध उत्पादन एवं उपार्जन में ऐतिहासिक वृद्धि देखने को मिल रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि इस मॉडल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और स्थानीय स्तर पर युवाओं तथा महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं, जिन्हें जिला प्रशासन द्वारा आगे भी हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

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