हल्द्वानी:अखिल भारतीय किसान महासभा, नैनीताल जिले के प्रतिनिधिगण अखिल भारतीय किसान महासभा के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन 20-21 सितंबर में भागीदारी करने के लिए जालंधर (पंजाब) रवाना हुए! ashok gulati एडिटर इन चीफ

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हल्द्वानी : अखिल भारतीय किसान महासभा, नैनीताल जिले के प्रतिनिधिगण अखिल भारतीय किसान महासभा के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन 20-21 सितंबर 2026, में भागीदारी करने के लिए जालंधर (पंजाब) रवाना हुए.

रवानगी से पूर्व अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष बहादुर सिंह जंगी ने बताया कि, किसान महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश की खेती और किसान के गंभीर संकट पर चर्चा के उपरांत किसान आंदोलन की रणनीति बनाई जायेगी। मोदी सरकार लगातार दावा करती है कि उसने किसानों के हित में ऐतिहासिक काम किए हैं। लेकिन किसानों की वास्तविक जिंदगी बदहाल है. मोदी सरकार की कृषि नीति किसान-केंद्रित नहीं किसान विरोधी है।

डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, सवाल केवल इतना नहीं है कि सरकार किसानों के लिए क्या कर रही है बल्कि आज बड़ा सवाल यह है कि सरकार खेती की पूरी व्यवस्था किसके हाथों में सौंप रही है? किसान के हाथ में? या बड़े कॉरपोरेट के हाथ में? उन्होंने कहा कि, भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार समझौते को मंजूरी देकर मोदी सरकार ने भारत के किसान, खेत मजदूर, उपभोक्ता और खाद्य सुरक्षा पर हमला बोल दिया है. इसके साथ ही प्रस्तावित बीज विधेयक के माध्यम से मोदी सरकार बीज पर बड़े पूंजीपतियों का कॉरपोरेट नियंत्रण स्थापित करना चाहती है. कुल मिलाकर मोदी सरकार की कृषि नीति किसान विरोधी है इसलिये इसका पुरजोर विरोध जरूरी है.

किसान महासभा के नैनीताल जिला सचिव नैन सिंह कोरंगा ने कहा कि, भाजपा सरकार ने अपनी जनविरोधी नीतियों के माध्यम से मेहनतकश किसान मजदूर आबादी का जीना मुहाल कर दिया है. भाजपा – भूमि का मालिकाना, आवास, शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, महँगाई, भ्रष्टाचार- जरूरी मुद्दों से लोगों का ध्यान बांटने के लिए विभाजन और नफरत की राजनीति का खतरनाक कार्ड खेल रही है. इस विभाजनकारी राजनीति को ध्वस्त किया जाना जरूरी है और इसके खिलाफ मजदूरों किसानों और आम जनता की एकता के बल पर जनविरोधी नीतियों को वापस लेने के लिए सरकार को विवश करना होगा.

किसान महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में जाने वाले नैनीताल जिले के प्रतिनिधियों में मुख्य रूप से बिंदुखत्ता, बागजाला, सुल्ताननगरी समेत जिले के पर्वतीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि हैं जिनमें बहादुर सिंह जंगी, डॉ कैलाश पाण्डेय, नैन सिंह कोरंगा, पुष्कर दुबड़िया, किशन बघरी, प्रेम सिंह नयाल, निर्मला शाही, कमल जोशी, परवेज अहमद, उर्मिला मौर्य, दीवान सिंह बर्गली, अमीर चंद, अंबा दत्त बसखेती, त्रिलोक शाह, जयंती नयाल, निशा शामिल हैं.|

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