रानीखेत: विधानसभा 50: चुनावी मैदान में उतरे हीरा रावत, जनसंपर्क और सामाजिक कार्यों से बनाई बढ़त ,विधानसभा चुनाव का बजाया बिगुल! संदीप पाठक की रिपोर्ट

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रानीखेत, 17 सितम्बर:उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों और आजाद प्रत्याशियों ने अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में रानीखेत (विधानसभा 50) से प्रबल दावेदार और क्षेत्र के चर्चित चेहरे हीरा रावत लगातार जनता के बीच सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनके हालिया कार्यकलापों और जनसमस्याओं को लेकर किए जा रहे संघर्षों ने उन्हें इस समय क्षेत्र की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। जन-संवाद और गांव-गांव का रुखपिछले कुछ महीनों में हीरा रावत ने रानीखेत विधानसभा के अंतर्गत आने वाले सुदूर ग्रामीण इलाकों का सघन दौरा किया है। उन्होंने ‘जन-संवाद’ कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं को करीब से समझा है। उनके कार्यकलापों में मुख्य रूप से शामिल हैं:सड़क और पानी की समस्या पर मुखरता: क्षेत्र के पहाड़ी गांवों में पेयजल संकट और बदहाल संपर्क मार्गों को लेकर उन्होंने प्रशासन के खिलाफ कई बार आवाज उठाई है और कई जगहों पर निजी प्रयासों से भी तात्कालिक राहत पहुंचाई है।युवाओं और रोजगार पर फोकस: उत्तराखंड के युवाओं में बढ़ते पलायन और बेरोजगारी Pahad TV को लेकर हीरा रावत लगातार मुखर रहे हैं। वह स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए युवाओं के साथ मिलकर रणनीतियां साझा कर रहे हैं।श स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कदमग्रामीणों के अनुसार, हीरा रावत केवल चुनावी मौसम में ही नहीं, बल्कि इससे पहले भी सामाजिक आपदाओं और संकट के समय अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई दिए हैं। हाल ही में उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करवाया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुफ्त चिकित्सा परामर्श और दवाइयां मिल सकीं। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों की बदहाली और बच्चों की बुनियादी शिक्षा के अधिकारों के लिए भी वे लगातार संघर्षरत हैं। क्या कहती है रानीखेत की जनता?ग्राउंड जीरो पर बातचीत के दौरान स्थानीय निवासियों का मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। ताड़ीखेत और द्वाराहाट ब्लॉक से जुड़े कुछ ग्रामीणों का कहना है, “हीरा रावत जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेता हैं। वे सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते हैं।” वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रानीखेत की पारंपरिक सीटों पर बड़े दलों को टक्कर देना आसान नहीं होगा, लेकिन हीरा रावत के लगातार बढ़ते कार्यकलाप स्थापित राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ या बना सकते हैं। आगे की राह और सियासी समीकरणउत्तराखंड की राजनीति में आगामी चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाले हैं। ऐसे में विधानसभा प्रत्याशी हीरा रावत के बढ़ते कदम और जनता के बीच उनकी पैठ विरोधियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। आने वाले समय में यह देखना बेहद अहम होगा कि उनके ये सामाजिक कार्यकलाप चुनावी वोट बैंक में कितने तब्दील हो पाते हैं।

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