


चम्पावत 12 सितम्बर ।
. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि एवं औद्यानिकी को आधुनिक तकनीक से जोड़कर स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन में उद्यान विभाग द्वारा जनपद चम्पावत में किसानों को आधुनिक औद्यानिकी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, फल उत्पादन एवं अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक उदाहरण विकासखण्ड लोहाघाट के ग्राम भेंटी, ग्राम सभा डूंगरी फर्त्याल निवासी प्रगतिशील कृषक रघुवरदत्त मुरारी हैं, जिन्होंने आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपनी कृषि को बहुआयामी और आयोन्मुखी बनाया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से परास्नातक रघुवरदत्त मुरारी को खेती की प्रेरणा अपने पिता धर्मानंद मुरारी से मिली। पिता को खेती करते देखकर कृषि एवं उद्यानिकी के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने अपनी शिक्षा एवं आधुनिक सोच का उपयोग खेती में करने का निर्णय लिया।
वर्तमान में उनके पास लगभग 633 वर्गमीटर क्षेत्रफल में चार पॉलीहाउस हैं, जिनमें ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा सहित विभिन्न सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से उन्होंने विभिन्न वर्षों में शिमला मिर्च एवं टमाटर का अच्छा उत्पादन प्राप्त किया है।
सब्जी उत्पादन के साथ ही उन्होंने फल उत्पादन को भी अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उद्यान विभाग के सहयोग से उन्होंने लगभग 60 सेब के पौधे लगाए हैं तथा करीब 10 नाली क्षेत्र में कीवी की बागवानी विकसित की है। कीवी के पौधों में फलन भी प्रारंभ हो चुका है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025-26 में लगभग ढाई नाली क्षेत्र में एम-9 सेब का रोपण किया गया है।
आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से रघुवरदत्त मुरारी वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन भी कर रहे हैं। इसके लिए आधुनिक मधुमक्खी बक्सों के साथ पारंपरिक तरीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही गोबर एवं केंचुओं की सहायता से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर उसका उपयोग खेतों एवं बागानों में किया जा रहा है।
उद्यान विभाग द्वारा समय-समय पर उपलब्ध कराए गए पौध, बीज, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग एवं तकनीकी सहयोग से उनकी औद्यानिकी गतिविधियों को मजबूती मिली है। वर्ष 2025-26 में ‘किसान की कहानी, किसान की जुबानी’ अभियान के अंतर्गत उनके खेत पर कृषक भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिससे क्षेत्र के अन्य किसानों को आधुनिक औद्यानिकी एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिली।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां फल एवं सब्जी उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। किसानों को परंपरागत खेती के साथ आधुनिक उद्यानिकी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, फल उत्पादन, मधुमक्खी पालन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आजीविका को और मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को पात्र किसानों तक योजनाओं एवं तकनीकी सहयोग का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
प्रगतिशील कृषक रघुवरदत्त मुरारी की सफलता यह संदेश देती है कि शिक्षा से मिली आधुनिक सोच, पिता से मिली खेती की प्रेरणा और वैज्ञानिक औद्यानिकी तकनीकों के समन्वय से पर्वतीय क्षेत्र में खेती को बेहतर आजीविका एवं आय का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।