बागेश्वर:आपदा प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचा जिला प्रशासन, सड़कों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक समाधान पर दिया जोर! ashok gulati एडिटर इन चीफ

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लाहुर-मिकिला-खलपट्टा सड़क की खराब स्थिति पर डीएम सख्त, निर्माण गुणवत्ता की होगी जांच

जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने कपकोट क्षेत्र के आपदा प्रभावित एवं दुर्गम आंतरिक क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भराड़ी, रीठाबगड़, सोंग, हरसिंग्याबगड़, शामा आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर अतिवृष्टि और बारिश के कारण सड़कों को हुई क्षति एवं क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

जिलाधिकारी ने भराड़ी-मुनार मार्ग पर भैंसखाली के समीप गदेरे से क्षतिग्रस्त सड़क का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके पश्चात उन्होंने भराड़ी-मुनार सड़क पर उदियारी गांव के समीप हुए भूस्खलन का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क की स्थिति, सुरक्षा एवं गुणवत्ता का विस्तृत आकलन किया। निरीक्षण के दौरान जहां कहीं भी कमियां पाई गईं, वहां उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए सभी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ब्रिडकुल द्वारा निर्मित लाहुर-मिकिला-खलपट्टा सड़क की खराब स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने नकौनाबसौरा क्षेत्र में वॉशआउट एवं क्षतिग्रस्त सड़क का भी निरीक्षण किया तथा समस्त विभागों को आवश्यक सुरक्षात्मक एवं पुनर्स्थापना कार्य प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि आपदा के दौरान केवल सड़कों को अस्थायी रूप से यातायात के लिए खोलना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। सड़क सुरक्षा एवं पुनर्निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील एवं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और स्थायी समाधान विकसित किए जाएं, ताकि भविष्य में होने वाली क्षति को कम किया जा सके और आमजन को सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन की सुविधा मिल सके।

निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी कपकोट अनिल चनियाल, पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता अंबरीश रावत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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