चंपावत:गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण में जिलाधिकारी ने लिया त्वरित संज्ञान,जांच समिति गठित कर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच के दिए निर्देश,चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर सामने आए तथ्य, जांच के बाद ही होगा अंतिम निष्कर्ष! Ashok gulati एडिटर इन चीफ

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चंपावत :गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण का जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच के लिए जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों एवं सभी तथ्यों का बारीकी से परीक्षण कर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि श्रीमती प्रियंका, उम्र 22 वर्ष, ने 18 अगस्त 2026 को उप जिला चिकित्सालय, लोहाघाट में ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श लिया था। मरीज द्वारा बताया गया कि लगभग दो दिनों से उसे गर्भस्थ शिशु की हलचल महसूस नहीं हो रही थी। उपलब्ध चिकित्सकीय जांच एवं अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक चिकित्सकीय सलाह एवं प्रबंधन किया गया।

उन्होंने बताया कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार 12 अगस्त 2026 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु जीवित पाया गया था। रिपोर्ट में शिशु की हृदय गति 135 प्रति मिनट दर्ज है तथा फीटल मूवमेंट्स एवं कार्डियक मूवमेंट्स मौजूद होने का उल्लेख है। गर्भावस्था की अवधि लगभग 34 सप्ताह बताई गई है।

वहीं, 18 अगस्त 2026 की बाहरी/निजी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु की कार्डियक एक्टिविटी अनुपस्थित पाई गई तथा फीटल डिमाइस का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में फीटल मूवमेंट्स भी अबसेंट दर्ज हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध दोनों रिपोर्टों से 12 अगस्त को गर्भस्थ शिशु के जीवित होने तथा 18 अगस्त को fetal demise (फीटल डिमाइस) पाए जाने की पुष्टि होती है। उपलब्ध अभिलेखों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि गर्भस्थ शिशु की मृत्यु दो सप्ताह पूर्व ही हो गई थी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गर्भस्थ शिशु की मृत्यु का वास्तविक समय और कारण केवल दो अल्ट्रासाउंड रिपोर्टों के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित चिकित्सकीय अभिलेखों, मातृ स्वास्थ्य की स्थिति एवं आवश्यक अन्य जांचों का विस्तृत परीक्षण किया जाना आवश्यक है।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रकरण में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय सभी तथ्यों एवं चिकित्सकीय अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने जांच समिति को संवेदनशीलता एवं पूरी गंभीरता के साथ जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अपील की है कि जांच पूरी होने से पूर्व किसी व्यक्ति अथवा चिकित्सकीय संस्थान के संबंध में निष्कर्ष निकालने से बचा जाए। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही प्रकरण में आवश्यक निर्णय एवं कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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