चंपावत:मुख्यमंत्री के स्वरोजगार संकल्प को साकार करती जौल की महिलाएँ: चप्पल उद्योग से बुन रहीं आत्मनिर्भरता का ताना-बाना”,पारंपरिक खेती से चप्पल उद्योग तक: जौल की महिलाओं ने स्वरोजगार से बदली अपनी तकदीर, क्षेत्र के लिए बनीं मिसाल!! ashok gulati एडिटर इन चीफ

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चंपावत +उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के स्वरोजगार और स्थानीय आत्मनिर्भरता के विजन को धरातल पर उतारते हुए विकास खंड के ग्राम पंचायत जौल की महिलाओं ने एक अनूठी मिसाल पेश की है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत वर्ष 2019 में गठित ‘सरस्वती स्वयं सहायता समूह’ की छह कर्मठ महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। यह समूह पारंपरिक आजीविका के साधनों जैसे गौ पालन, सब्जी उत्पादन, पहाड़ी केले की खेती और शहद उत्पादन में तो पहले से ही संलिप्त था, लेकिन इन्होंने अपने सपनों को एक नई उड़ान देने की ठानी।

अपने पैरों पर खड़े होने और कुछ नया करने के इसी जज्बे के साथ इन महिलाओं ने चप्पल और क्रॉक्स बनाने की एक आधुनिक यूनिट स्थापित कर अपने व्यावसायिक सफर को एक नया मोड़ दिया।

इस यूनिट को शुरू करने के लिए समूह की महिलाओं ने ग्राम संगठन के सीआईएफ (CIF) से ₹1 लाख और सीसीएल (CCL) के माध्यम से ₹1 लाख का ऋण प्राप्त किया।

इस वित्तीय सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने उत्पादन कार्य को बेहद पेशेवर तरीके से प्रारंभ किया।
काम की शुरुआत होते ही इन महिलाओं के उत्पादों को बाजार में हाथों-हाथ लिया गया।

शुरुआती दौर में ही चप्पलों की इतनी शानदार डिमांड आई कि महिलाओं का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। समूह ने देखते ही देखते खटीमा से मिली 400 चप्पलों, बनबसा की 400 चप्पलों, अमोड़ी की 25 चप्पलों और सितारगंज की 600 चप्पलों की बड़ी डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा कर दिया है।

इतनी जल्दी इतने बड़े बाजार में अपनी पहचान बनाना इन महिलाओं की कार्यकुशलता और उनके उत्पादों की बेहतरीन गुणवत्ता को दर्शाता है।

प्रारंभिक चरण में मिली यह शानदार सफलता न केवल इन छह महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुकी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘लोकल फॉर वोकल’ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के संकल्प को साकार करता यह सरस्वती स्वयं सहायता समूह आज स्वावलंबन, साहस और सामूहिक प्रयास की एक जीती-जागती मिसाल बन चुका है।

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