रानीखेत: (2027 विधानसभा चुनाव)✅ चुनावी सरगर्मियां तेज, ‘विधायक जी’ का टिकट कटेगा? ‌भाजपा में दावेदारोंकी लंबी लिस्ट, हाई कमान चिंतित? जनता हताश एवं व्यापारी नाराज, पर्यटन नगरी मैं सन्नाटा, क्या इस बार भाजपा की नैया पार होगी!!✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ/संदीप पाठक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

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आखिर टूरिस्ट क्यों नहीं आ रहे हैं? उनका कहना है कि देखने लायक यहां कुछ भी नहीं?

रानीखेत (अल्मोड़ा)। अल्मोड़ा जनपद की महत्वपूर्ण रानीखेत विधानसभा चुनाव विधानसभा चुनाव) चुनावी सरगर्मियां तेज, हो गई है, जनता जनार्दन में जबरदस्त चर्चा है की वर्तमान विधायक जी’ का टिकट कटेगा? या फिर दोबारा ‌भाजपा संगठन दोबारा विधायकजी पर भरोसा करेगी, वहीं दूसरी दावेदारों की लंबी लिस्ट, हाई कमान चिंतित दिखाई दे रहा है , क्षेत्र की जनता एवं व्यापारी नाराज है क्योंकि उनका व्यवसाय बुरी तरह से चौपट हो गया है, पर्यटन नगरी मैं सन्नाटा छाया हुआ है, क्योंकि विकास यहां पर शून्य है, जिला ना बनने से लोग नाराज हैं, ऐसे में इस बार भाजपा की नैया पार होगी!! भले अभी विधानसभा चुनाव में कुछ महीने दूर हों, परंतु रानीखेत में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। भाजपा में टिकट को लेकर संभावित दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। जिससे हाई कमान भी चिंतित नजर आ रहा है, कई नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इससे पार्टी के भीतर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। और अपने अपने वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं,

चर्चा के अनुसार वर्तमान में भाजपा में दीप पांडेय, धन सिंह रावत, गोपाल उप्रेती, कैलाश पंत संभावित दावेदारों के रूप में सक्रियता बड़ा रहे है। सभी नेता अलग-अलग माध्यमों से जनता के बीच पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं वर्तमान विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल भी क्षेत्र में लगातार सक्रियता बढ़ाते हुए संगठन विस्तार और जनसंपर्क कार्यक्रमों में जुटे हैं। हाल के दिनों में विभिन्न दलों और संगठनों से जुड़े कई लोगों के भाजपा में शामिल होने को भी उनकी सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी रानीखेत जिला ना बनने के कारण विकास ठप पड़ा हुआ है, विश्व पर्यटन नगरी में कभी टूरिस्ट की भीड़ होती थी, चौपटिया गार्डन जो अपने सेव के लिए विश्व विख्यात था, आज गार्डन अपनी बदहाली पर आंसू निकल रहा है, टूरिस्ट के लिए ऐसा कई मनोरंजन का साधन नहीं है, जो यहां पर दो-तीन दिन रुक जाए। नागरिकों का कहना था यहां हर पार्टी के नेताओं ने चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वदे किए, उनको जीत कर भी भेजा, बड़े-बड़े पदों पर भी रहे, परंतु रानीखेत के लिए कुछ भी नहीं किया। हालांकि जनता ने नेताओं को अगले चुनाव में बुरी तरह हराया। वहीं भाजपा पार्टी में आगामी विधानसभा चुनाव देखते हुए

क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से नेता जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही दावेदारों ने अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है।भाजपा में बढ़ी दावेदारों की सक्रियता, संगठन के सामने संतुलन की चुनौती

भाजपा में बढ़ती दावेदारी संगठन के लिए चुनौती बन सकती है। मौजूदा विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल के साथ अन्य संभावित दावेदार भी लगातार सक्रिय हैं। हालांकि अभी चुनाव में कुछ समय है, लेकिन क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है , जनता खामोश है, क्या इस बार रानीखेत का इतिहास दोहराया जाएगा, जो एक बार जीत जाता है, दोबारा जितने के लिए लोहे के चने चबाने पढ़ते हैं, मजेदार बात यह है कि कांग्रेस में कोई भी हलचल नहीं है, संभावना है कि और पूर्व विधायक करण मेहरा के ऊपर पार्टी दाव लगा सकती है, बरहाल अल्मोड़ा की जनपद की महत्वपूर्ण रानीखेत विधानसभा चर्चाओं मे है?

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