
चंपावत:उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और ‘आदर्श चंपावत’ की परिकल्पना जनपद के सुदूर ग्रामीण अंचलों में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की एक नई कहानी लिख रही है।
चंपावत जिला मुख्यालय से दूर पाटी विकासखंड का सीमांत गांव ‘डिक्टी’ आज एक ऐसी ही आजीविका क्रांति का साक्षी बना है, जिसने साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का ईमानदार सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
डिक्टी गांव की रहने वाली श्रीमती शांति देवी की कहानी इसी संकल्प और स्वावलंबन का एक जीवंत उदाहरण है।
परियोजना के आगमन से पूर्व, शांति देवी का जीवन अत्यधिक संघर्षों और आर्थिक तंगहाली के साए में बीत रहा था। उनके पति श्री ललित मोहन गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के कारण कोई भी शारीरिक श्रम या आजीविका का साधन अपनाने में पूरी तरह असमर्थ थे।
ऐसे कठिन समय में पूरे परिवार के भरण-पोषण और दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की पूरी जिम्मेदारी शांति देवी के कंधों पर आ गई थी।
बिना किसी निश्चित आय और ठोस वित्तीय साधन के, उनके सामने अपने परिवार को एक सम्मानजनक जीवन देना एक बेहद कठिन चुनौती बन चुका था। आर्थिक विपन्नता के उस दौर में वे लगातार किसी ऐसे अवसर की तलाश में थीं जो उनके परिवार को इस संकट से उबार सके। तभी ग्रामोत्थान परियोजना, आईएफएडी (IFAD), केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) और एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (ILSP) के साझा प्रयासों ने शांति देवी जैसे कर्मठ परिवारों के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई।
इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत डिक्टी गांव में ‘परिवर्तन महिला संकुल संघ’ के अधीन ‘आदर्श स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया गया, जिसमें शांति देवी सहित गांव की नौ कर्मठ महिलाओं को जोड़ा गया।
परियोजना की टीम ने जब गांव का दौरा किया, तो उन्होंने न केवल शांति देवी की विपरीत परिस्थितियों को समझा बल्कि उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने के जज्बे को भी पहचाना।
आवश्यक भौतिक सत्यापन और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, शांति देवी को लघु उद्यम स्थापना योजना के तहत ‘गाय पालन’ व्यवसाय के लिए चुना गया। इस व्यवसाय को धरातल पर उतारने के लिए उन्हें कुल 3,00,000.00 (तीन लाख) रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिसमें नियमानुसार 75,000.00 रुपये की अनुदान राशि, 1,50,000.00 रुपये का बैंक ऋण और 75,000.00 रुपये लाभार्थी अंशदान शामिल था।
इस वित्तीय और संस्थागत सहयोग के बल पर शांति देवी ने अच्छी गुणवत्ता वाली तीन दुधारू गाएं खरीदीं और अपने घर से ही दुग्ध उत्पादन का कार्य पूरी निष्ठा के साथ प्रारंभ किया। वर्तमान में वे प्रतिदिन 8 से 10 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं और शुद्ध दूध बेचने के साथ-साथ घर पर ही खोया एवं पनीर जैसे दुग्ध उत्पाद बनाकर बाजार में बेचती हैं।
इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने 6,000 से 7,000 रुपये की एक निश्चित और नियमित आय प्राप्त हो रही है। इस आत्मनिर्भरता ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है, बल्कि उनके बीमार पति की देखभाल और बच्चों की दैनिक आवश्यकताओं को भी एक बेहतर ढंग से पूरा करने का जरिया दिया है।
श्रीमती शांति देवी की यह सफलता आज पाटी विकासखंड और पूरे चंपावत जनपद के लिए एक मिसाल बन चुकी है। यह कहानी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मुख्यमंत्री जी की ‘आदर्श चंपावत’ की परिकल्पना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उनके पलायन को रोकने और उनके जीवन स्तर को सुधारने में पूरी तरह सफल सिद्ध हो रही है।
शांति देवी का यह सफर दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सुदृढ़ता और संस्थागत सहयोग से पहाड़ की मातृशक्ति स्वावलंबन की एक नई पहचान गढ़ सकती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मुख्य सूत्रधार बन सकती है।