हल्द्वानी: “ऐसे बन रहे हैं फर्जी पत्रकार”, ‘चौकिए मत’यह सत्य है, विशेष छानबीन पर जो मामला प्रकाश में आया है वह हैरतअंगेज है…! प्रस्तुत है एक्सक्लूसिव रपोर्ट

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“पत्रकार प्रेस महासंघ उत्तराखंड अध्यक्ष अशोक गुलाटी ने कहा शीघ्र ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा”…

हल्द्वानी: “ऐसे बन रहे हैं फर्जी पत्रकार”, ‘चौकिए मत’यह सत्य है, विशेष छानबीन पर जो मामला प्रकाश में आया है वह हैरतअंगेज है…! प्रस्तुत है एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।/यदि आप पत्रकार बनना चाहते हैं कोई दिक्कत नहीं है, तहसील, जिला ब्यूरो चीफ, मंडल ब्यूरो चीफ, राज्य ब्यूरो चीफ बिना किसी पढ़ाई लिखाई के आसानी से बनते जा रहे हैं, यदि आप अपराधी हैं, ठेकेदारी कर रहे हैं, कोई दिक्कत नहीं है, आप माननीय पत्रकार साहब बन सकते हैं, अरे आप तो चौक गए ना, परंतु यह सत्यहै, फेसबुक में आपको शाहजहांपुर, लखनऊ सहित अन्य जनपदों के पोर्टल चैनलों द्वारा पत्रकार बनिए, पढ़ने को मिल रहा होगा , मजेदार बात यह है कि इनका रेट आधारित है, यदि आप तहसील के अध्यक्ष बनना चाहते हैं,₹1100, जिले के 5 000 हजार, और राज्य के ₹11000 लेकर धड़ल्ले से आई कार्ड एवं पत्र दे रहे हैं, इस मामले मैं खोजबीन करने पर हैरतअंगेज मामला सामने आया, इस मामले में पत्रकार बनने वाले एक तथा कथित पोर्टलचैनल के व्यक्ति से संपर्क किया उसको अपना नाम गोपनीय रखा बताया कि मेरा अपराधिक कई मामले चल रहे हैं,’ तपाक’ से उसने कहा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, आप पैसा ऑनलाइन भेज दें ,तत्काल आपके पास आईडी एवं पत्र आ जाएगा, यही करण है कि आज रेता बजरी से लेकर जिसे का खा गा का भी ज्ञान नहीं है, वह पैसे देकर धड़ल्ले से आ रहे हैं, जिससे पत्रकारों की छवि निरंतर खराब होती ज रही है, वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिकारी भी परेशान है की कौन असली पत्रकार है, कौन फर्जी, इस तरह आज फर्जीवाड़ा चल रहा है मैं ने अपने 45 साल की पत्रकारिता में इस तरह का गोरखधंधा नहीं देखा है, यही कारण है कि ….

आज वरिष्ठ पत्रकार ना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाते हैं ,क्योंकि वहां फेसबुक के फर्जी पत्रकारों की बाढ़ रहती है, और सबसे पहले आगे की कुर्सी में जम जाते हैं, एक और मजेदार बात यह है कि फर्जी पत्रकार ही वरिष्ठ पत्रकार का परिचय पूछता है, और कहता है कि आपको पहले कहीं देखा नहीं , विभिन्न नाम की आईडी लगाकर घूमते हुए चौकी एवं थाने , मैं अक्सर आपको इनके दर्शन हो जाएंगे?, पत्रकार प्रेस महासंघ उत्तराखंड अध्यक्ष अशोक गुलाटी ने शासन से मांग की है, शासन से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची सभी विभागों मे लगाई जाए, और लगातार फर्जी पत्रकारों की बाढ़ पर अंकुश लगाया जाए, शीघ्र ही एक प्रतिनिधि मण्डल मुख्यमंत्री से मिलकर ज्ञापन देंगे, जिस पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। प्रशासन को चाहिए कि पत्रकारों की वैधता की जांच के लिए ठोस व्यवस्था लागू करे और फर्जी तरीके से पत्रकारिता करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि असली और फर्जी पत्रकारों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए, ताकि समाज में पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और आम जनता का भरोसा कायम रह सके।

जानकारी के मुताबिक, कुछ लोग प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ-साथ पत्रकारिता का चोला ओढ़कर अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने का काम कर रहे हैं। ये लोग खुद को “वरिष्ठ पत्रकार” बताकर सरकारी कार्यालयों में पहुंचते हैं और अपने कथित मीडिया प्रभाव का इस्तेमाल निजी स्वार्थ सिद्ध करने के लिए करते हैं। कई मामलों में अधिकारियों को गुमराह कर फैसलों को प्रभावित करने की कोशिशें भी सामने आ रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों की वजह से असली और ईमानदार पत्रकारों की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। समाज में पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की साख को नुकसान पहुंच रहा है, जो कि लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

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