








नैनीताल/मुनस्यारी, पिथौरागढ़ 07 जून, l
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज 14वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के मुनस्यारी स्थित टुकड़ी के अधिकारियों एवं जवानों के साथ संवाद किया। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, नागरिक सहयोग तथा राष्ट्र सेवा में आईटीबीपी के योगदान की सराहना करते हुए जवानों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा, “यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि मुझे मुनस्यारी आने तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के वीर जवानों, अधिकारियों एवं उनके परिवारों से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। जिस उच्च मनोबल, समर्पण और अनुशासन के साथ आप सभी इस दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं, वह वास्तव में प्रेरणादायी है।
राज्यपाल ने कहा आपका अटूट कर्तव्यबोध और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। विषम परिस्थितियों एवं कठिन मौसम के बावजूद आपकी मुस्तैदी और प्रतिबद्धता राष्ट्र के प्रति आपकी निष्ठा को दर्शाती है। पूरे देश को आप पर गर्व है।”
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड वीरों की भूमि है और यहां की गौरवशाली सैन्य परंपरा देश की अमूल्य धरोहर है। राज्यपाल ने कहा कि सैनिक का जीवन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च संकल्प है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा, विकास और समृद्धि हमारे जवानों की सतत सजगता एवं त्याग पर आधारित है।
राज्यपाल ने आईटीबीपी की 14वीं वाहिनी द्वारा सीमा सुरक्षा, रेस्क्यू अभियानों, लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग, हिमाद्री अभियान तथा ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसी पहलों में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों एवं जवानों को बधाई दी। तत्पश्चात
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) आज मुनस्यारी से गंगोलीहाट पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध मां हाट कालिका मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं जनपदवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मंगलमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों से संवाद करते हुए क्षेत्र के विकास, पर्यटन संभावनाओं एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने मां हाट कालिका मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से भी भेंट कर मंदिर की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने मंदिर परिसर में विकसित व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण तथा उनका सुव्यवस्थित विकास न केवल आस्था के केंद्रों को सुदृढ़ करता है, बल्कि पर्यटन संवर्धन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान करता है।
राज्यपाल ने कहा कि मां हाट कालिका के दर्शन एवं पूजा-अर्चना का अवसर प्राप्त होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और आध्यात्मिक संतोष का विषय है। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशकों तक भारतीय सेना में सेवा के दौरान उनका कुमाऊं रेजीमेंट से गहरा जुड़ाव रहा है और “जय मां कालिका” का उद्घोष सदैव सैनिकों के मनोबल एवं राष्ट्रसेवा की प्रेरणा का स्रोत रहा है।
उन्होंने कहा कि मां कालिका की कृपा और आशीर्वाद से भारतीय सैनिकों ने राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए अद्वितीय योगदान दिया है। आज मां के दरबार में उपस्थित होकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आत्मिक शांति का अनुभव हो रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि गंगोलीहाट स्थित मां हाट कालिका मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि कुमाऊं की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने मंदिर समिति एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों को गंभीरता से लेने का आश्वासन देते हुए कहा कि कुमाऊं मंडल के प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं मंदिर श्रृंखला को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पिथौरागढ़ जनपद आज पर्यटन एवं धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। पिछले वर्षों की तुलना में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो जनपद की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत विश्वभर के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।
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