हल्द्वानी:आर्ट ऑफ लिविंग ने ‘अनसुने दैनिक नायक’ (Unsung Heroes) को किया सम्मानित,गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव एवं संस्था के 45 वर्ष पूर्ण होने पर कुमाऊँ मंडल के कर्मयोगियों का अभिनंदन ! ashok gulati एडिटर इन चीफ

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हल्द्वानी (उत्तराखंड), 3 मई l :आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा देशभर में आयोजित की जा रही ‘अनसुने नायक पुरस्कार’ (Unsung Heroes Awards) श्रृंखला के अंतर्गत आज कुमाऊँ मंडल, उत्तराखंड के लिए एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । कार्यक्रम हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में सम्पन्न हुआ, जिसमें समाज के उन कर्मयोगियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।
यह आयोजन वैश्विक आध्यात्मिक गुरु एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के 70वें जन्मोत्सव तथा संस्था के मानवता की सेवा के 45 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया ।
गरिमामयी अतिथि उपस्थिति: समारोह के मुख्य अतिथि श्री अजय भट्ट जी (सांसद, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर) रहे। विशिष्ट अतिथियों में श्री गजराज सिंह विष्ट (मेयर, हल्द्वानी) उपस्थित रहे । इसके अतिरिक्त शहर के अनेक गणमान्य जन कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए, जिनमें डॉ. हरीश चन्द्र सती, श्री दीपक बल्यूटिया, डॉ. गीतिका बल्यूटिया, कुसुम पांडे, श्रीमती पूनम साहनी, श्रीमती योगिता पाल, आयुष्मान साहनी प्रमुख रहे ।
‘अनसुने नायक’ सम्मानित: कुमाऊँ मंडल के विभिन्न जिलों से चयनित निम्न कर्मयोगियों को सम्मानित किया गया —
व्यापार एवं परोपकार श्रेणी: श्री रविंदर सिंह नेगी (काशीपुर) श्री मोहन चंद्र उप्रेती (गरुड़, बागेश्वर) तत्वा होम्स प्रा. लिमिटेड (अल्मोड़ा) सुश्री रेशमा टंडन (नैनीताल)
खेल उत्कृष्टता श्रेणी: गुंजन बाला (बागेश्वर) हरीश राम (पिथौरागढ़) मुकेश चंद्र शर्मा (हल्द्वानी) राहुल सिंह मटेला (अल्मोड़ा)
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ: समारोह की शुरुआत वाद्य संगीत से हुई,
तत्पश्चात आर्ट ऑफ लिविंग की अंतः प्रज्ञा कार्यक्रम में प्रशिक्षिका राखी पांडेय जी द्वारा प्रशिक्षित बच्चों राघव, आराध्या, उर्वशी, सौम्या, जीविका भट्ट, भव्या पांडेय ने आँखों में पट्टी बाँधकर रंग भरना, पढ़ना-लिखना , अनजान व्यक्तियों के बारे जानकारी जैसे अनेकानेक हैरतअंगेज कार्य किए । साथ ही अपने आत्मविश्वास, पढ़ाई में हुई अद्भुत उन्नति के बारे में भी बताया।
जिसके पश्चात गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी एवं आर्ट ऑफ लिविंग की प्रेरणादायक यात्रा पर आधारित ‘Love Moves the World’ लघु फिल्म प्रस्तुत की गई। अतिथियों के स्वागत के बाद दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि संस्था ने पिछले साढ़े चार दशकों में 182 देशों में 100 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। संस्था द्वारा 65 देशों में 8 लाख से अधिक कैदियों का पुनर्वास, 1357 निःशुल्क विद्यालयों के माध्यम से 1.2 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा, हजारों जल संरक्षण परियोजनाएं एवं प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने जैसे अनेक कार्य किए गए हैं।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने अपने संबोधन में बहुविध वैश्विक उत्थान के लिए गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के योगदान की खुले दिल से प्रशंसा की तथा सभी प्रतिभागियों को गुरुदेव से प्रेरणा लेकर समाज में सेवा, करुणा और सकारात्मकता के प्रसार को और अधिक मजबूत करने की बात कही।
इसके उपरांत मुख्य अतिथि द्वारा स्मृति चिन्ह एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा शॉल भेंट कर पुरस्कार प्रदान किए गए। ज्यूरी सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की स्मृति में रुद्राक्ष वृक्ष का पौधारोपण कार्यक्रम परिसर में किया गया। सभी विजेताओं का सम्मानित करने के साथ-साथ उसके योगदान को सभी अतिथियों के साथ सामूहिक छायाचित्र लिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आर्ट ऑफ लिविंग के
राज्य शिक्षक समन्वयक लोकेश पांडे, एपेक्स टीम के सदस्य श्रीमती रेशमा टंडन, जितेन्द्र कुमार साहनी, धीरेन्द्र कबड्वाल, रघुवीर सिंह कालाकोटी एवं मीडिया समन्वयक उद्योग भारती पांडेय, शिक्षक राखी पांडेय, आशीष छाबड़ा, अखिल, दीपक गुप्ता, उमा गुप्ता, विक्रम रघुवंशी, सागर, वन्दना तिवारी, कृष्णा, भगवती पांडेय, इत्यादि सहित अनेक स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा ।
कार्यक्रम का संचालन श्री भूषण तिवारी एवं रिचा जी द्वारा अत्यंत कुशलता से किया गया। समारोह में कुमाऊँ मंडल के सभी जिलों से आए आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षकों, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।….

आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा यह पुरस्कार देश के 490 से अधिक जिलों में आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य समाज में सेवा और करुणा की भावना से कार्य कर रहे सामान्य लोगों को विशेष पहचान प्रदान करना है।

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