ब्रेकिंग चंपावत : जनपद के चारों सीटों पर निकाय चुनाव मे भगवा लहराया!

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🌷चंपावत में कांटे के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी प्रेमा पांडे को किया गया विजयी घोषित|

🌷लोहाघाट में भाजपा के गोविंद वर्मा ने रिकॉर्ड मतों से दर्ज की अपनी जीत।

चंपावत। आखिरकार वर्ष 2018 में भाजपा का जिले में सुपड़ा साफ करने वाले नगर के लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के काम पर वोट देकर जिले की चारों निकाय सीटों में भाजपा का परचम लहरा दिया है| लोहाघाट में पहली बार हुए नगर पालिका चुनाव में भाजपा के गोविंद वर्मा ने 1441 मतों से विजय हासिल कर अपने प्रतिदन्दी को काफी पीछे धकेल दिया| गोविंद ने वर्ष 2018 में हुए चुनाव की तुलना में अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर लिया था| वह पहले अपने निकटतम प्रतिदन्डी भाजपा के दीपक ओली से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मात्र 157 वोटो से जीते थे| इस दफा उनकी जीत का आंकड़ा कई गुना बढ़ गया हैं| गोविंद ने अपने अपने विपक्षीयों को कडा संदेश दिया है,जो जनरल सीट से ओबीसी प्रत्याशी को भाजपा का टिकट दिए जाने का अंदर से विरोध कर रहे थे| दो बार नगर पंचायत के अध्यक्ष रहे भूपाल सिंह मेहता इस दफा पहले की तुलना में काफी कम वोट प्राप्त कर सके| 2018 में उन्हें जहां 537 वोट मिले थे इस दफा वह मात्र 496 वोट ही प्राप्त कर सके|
चंपावत नगर पालिका में भाजपा प्रत्याशी प्रेमा पांडे ने कड़े मुकाबले में निर्दलीय ममता वर्मा को 110 मतों से पराजित किया| प्रेमा को 1964 तथा निर्दलीय ममता वर्मा को 1854 वोट मिले जबकि कांग्रेस की नीमा कठायत को 932 वोटो पर ही संतोष करना पड़ा|
हालांकि टनकपुर नगर पालिका एवं नगर पंचायत बनबसा में भाजपा द्वारा जीत हासिल कर दी गई है| लेकिन अभी सरकारी तौर पर आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो पाया है जिले की चारों सीटों में भाजपा प्रत्याशियों की जीत को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी क़ी व्यक्तिगत जीत बताया जा रहा है| हालांकि भाजपा के भीतर पार्टी में रहते हुए पार्टी को चूना लगाने वालों की कमी नहीं थी| बहरहाल जिले में पिछले 11 वर्षों से पार्टी संगठन को कुछ लोगों ने व्यक्तिगत जागीर बनाए रखा है ऐसे लोग सीएम धामी का माथा नीचे झुकाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं| हाल ही में कुछ ऐसे चेहरों को पार्टी में शामिल किया गया जिनका सिक्का लोगों की नजर में खोटा हो चुका है| यह तो गोविंद वर्मा की अपनी लोकप्रियता थी वह ऐसे लोगों की राजनीति का शिकार नहीं बन पाए अब मुख्यमंत्री को अपने मॉडल जिले में पार्टी संगठन में घुसे ऐसे चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाना होगा|

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