बागेश्वर:साइबर सुरक्षा माह’ व नशा उन्मूलन अभियान: पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चौकी प्रभारी रीमा ने बनलेख क्षेत्र में चलाया महा-जागरूकता अभियान; ग्रामीणों व दुकानदारों को सिखाए सुरक्षा के गुर! Ashok gulati एडिटर इन चीफ

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प्रेस नोट- बागेश्वर पुलिस ।

“ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन” को धरातल पर उतारने तथा पुलिस अधीक्षक बागेश्वर जितेन्द्र मेहरा (IPS) के कुशल आदेश-निर्देशों के अनुपालन में जनपद पुलिस द्वारा सुदूर ग्रामीण व सीमांत क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, साइबर ठगी से सुरक्षित रखने तथा नशे की कुरीतियों को जड़ से मिटाने हेतु लगातार “कम्युनिटी पुलिसिंग” के तहत विशेष चेकिंग व जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चौकी प्रभारी रीमा नरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा चौकी क्षेत्र के अंतर्गत सुदूरवर्ती बनलेख क्षेत्र में स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और छोटे-बड़े दुकानदारों/व्यापारियों के बीच एक वृहद जन-जागरूकता अभियान चलाया गया।
चौकी प्रभारी रीमा द्वारा मय पुलिस टीम के साथ बनलेख बाजार व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया गया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय दुकानदारों, व्यापारियों और ग्रामीणों को एक स्थान पर एकत्र कर विशेष सुरक्षा चौपाल लगाई। टीम ने उपस्थित जनसमुदाय को वर्तमान में पैर पसार रहे गंभीर साइबर अपराधों और नशे के जानलेवा दुष्प्रभावों के संबंध में सरल भाषा में जागरूक किया।
“साइबर सुरक्षा अभियान 2.0” व “साइबर जागरूकता माह” के अंतर्गत पुलिस टीम ने लोगों को वर्तमान में बढ़ रहे विभिन्न साइबर खतरों जैसे— “डिजिटल अरेस्ट”, सोशल मीडिया हैकिंग, फर्जी लॉटरी/केबीसी (KBC) मैसेज, संदिग्ध लिंक्स, यूपीआई पेमेंट फ्रॉड और बैंक अधिकारी बनकर आने वाली फर्जी कॉल्स के तौर-तरीकों के प्रति गहनता से आगाह किया। दुकानदारों और ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी (जैसे— ओटीपी, एटीएम पिन या यूपीआई पिन) साझा न करें।
चौपाल में उपस्थित नागरिकों और युवाओं में सुरक्षा का भाव सुदृढ़ करते हुए चौकी प्रभारी ने अपील की कि किसी भी प्रकार के शोषण, वित्तीय ठगी, उत्पीड़न अथवा अपराध की स्थिति में बिना किसी डर या संकोच के तत्काल पुलिस से विधिक सहायता प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि अपराध को सहना भी अपराध है, इसलिए सजग बनें और अपराध के खिलाफ आवाज उठाएं।
युवाओं को समाज को खोखला कर रही नशे की कुरीतियों के शारीरिक, मानसिक व आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति विस्तारपूर्वक सचेत किया गया। आपातकाल में त्वरित विधिक सहायता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया:
• साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930 (ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने हेतु)
• नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर: 1933 / मानस पोर्टल (नशे की तस्करी व अवैध बिक्री की गुप्त सूचना साझा करने हेतु) …

राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा: डायल 112 (त्वरित पुलिस व रेस्क्यू सहायता हेतु)
पुलिस टीम ने आश्वस्त किया कि समाज में अवैध नशा बेचने वाले या साइबर अपराधियों की गुप्त सूचना पुलिस को देने वाले जागरूक नागरिक की पहचान पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रखी जाएगी।

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