हल्द्वानी:उत्तराखंड की जल, जंगल, जमीन बेचने पर आमादा भाजपा सरकार, चहेतों को लाभ पहुंचाने का खेल: सुमित हृदयेश ✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ

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“सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपकर प्रदेश के हितों से खिलवाड़ कर रही भाजपा सरकार: गोविंद सिंह बिष्ट”

हल्द्वानी, 17 सितंबर ।

उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर राज्य की बेशकीमती जल, जंगल और जमीन को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि जिस उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा और सार्वजनिक संपत्तियों से है, आज उसी की बहुमूल्य जमीनों और सरकारी परिसंपत्तियों पर सरकार की नजर है।
उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड की सरकारी जमीनों को लंबे समय के लिए निजी हाथों में देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) की वेबसाइट पर नैनीताल के पटवाडांगर में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस के PPP प्रोजेक्ट से संबंधित निविदाएं दर्ज हैं।
भाजपा सरकार की नीतियों से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश की बहुमूल्य सरकारी संपत्तियों को चुनिंदा निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है।
उन्होंने कहा कि “जल, जंगल और जमीन उत्तराखंड की जनता की सामूहिक विरासत है। इसे किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकार के चहेतों के लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भाजपा सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश की बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है और इससे उत्तराखंड की जनता को क्या लाभ मिलेगा।

सुमित हृदयेश ने आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि सरकार के करीबी लोगों और बड़े कारोबारी समूहों को लाभ पहुंचाना भी है।
उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रदेश की संपत्तियों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि राजनीतिक चंदे और अपने हितों को मजबूत किया जा सके। सरकार को बताना चाहिए कि इन सौदों से उत्तराखंड के आम लोगों, स्थानीय युवाओं, छोटे कारोबारियों और भविष्य की पीढ़ियों को क्या मिलेगा?”

विधायक ने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट मामले में भी सरकारी निवेश से विकसित परिसंपत्तियों को निजी ऑपरेटर को 15 वर्षों के लिए दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में 142 एकड़ भूमि के लीज पर दिए जाने और लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस प्रकार के फैसलों पर चुप नहीं बैठेगी और उत्तराखंड की प्राकृतिक एवं सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच आवाज उठाती रहेगी।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि उत्तराखंड की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि यहां की आने वाली पीढ़ियों की पूंजी है।
उन्होंने कहा कि “आज सरकारी विभागों की जमीनें और बेशकीमती संपत्तियां निजी हाथों में देने की तैयारी हो रही है। कल अगर यही प्रक्रिया जंगलों, जलस्रोतों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंची तो उत्तराखंड के पास क्या बचेगा? सरकार को हर एक संपत्ति का पूरा हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।”
गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि निविदाओं की शर्तें किसके हित में बनाई जा रही हैं और स्थानीय लोगों तथा स्थानीय कारोबारियों के लिए उनमें कितनी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड के संसाधनों से उत्तराखंड के लोगों का पहला अधिकार होना चाहिए। भाजपा सरकार यदि अपने चहेते लोगों और बड़े कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी संपत्तियों को लंबे समय की लीज या PPP के नाम पर सौंपेगी, तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।”
सरकारी संपत्तियों का उपयोग जनहित, स्थानीय रोजगार, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रदेश के दीर्घकालिक हितों के लिए होना चाहिए, न कि चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के बीच जाकर सरकार से इन संपत्तियों की नीलामी, लीज और PPP प्रक्रिया की पूरी पारदर्शिता, शर्तों, मूल्यांकन और लाभार्थियों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग करेगी।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन को किसी भी कीमत पर निजी स्वार्थों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा और प्रदेश की जनता के हितों की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।

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