”एडवोकेट डॉ. पूरन चंद्र पांडे की अनूठी शैक्षणिक यात्रा, अब MBA के साथ 20वीं डिग्री की ओर कदम”…

रामनगर। [नैनीताल]
“सीखने की कोई उम्र नहीं होती और ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती।” इस विचार को अपने जीवन में ‘चरितार्थ ‘ कर रहे रामनगर के एडवोकेट डॉक्टर पूरन चंद्र पांडे ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो अपने आप में प्रेरणादायी है। उन्होंने वर्ष 2026 में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) से विकास अध्ययन में अपनी 19वीं डिग्री सफलतापूर्वक पूरी की है। खास बात यह है कि 19 डिग्रियां हासिल करने के बाद भी उनके कदम रुके नहीं हैं। उन्होंने इसी वर्ष MBA (Master of Business Administration) में प्रवेश के लिए आवेदन किया है, जो उनकी 20वीं डिग्री की शुरुआत होगी।
1998 से शुरू हुआ ज्ञान का सफर
डॉ. पूरन चंद्र पांडे की उच्च शिक्षा की यात्रा वर्ष 1998 में पहली स्नातक डिग्री से शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने लगातार विभिन्न विषयों में अध्ययन जारी रखा। कानून के साथ-साथ उन्होंने समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, विधि स्नातक, परास्नातक कानून, मानवाधिकार, मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र , राजनीति विज्ञान ,इतिहास ,हिंदी, योग , जनसंचार , दर्शनशास्त्र, ज्योतिष, पत्रकारिता, महात्मा गांधी एवं शांति अध्ययन और विकास अध्ययन जैसे विविध क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त की। कानून के क्षेत्र में उन्होंने LL.B., LL.M. और Ph.D. जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं हासिल कीं। उनके अध्ययन का दायरा केवल एक विषय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अलग-अलग विषयों को समझने और उनके बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया।
चार विश्वविद्यालयों से हासिल कीं शैक्षणिक उपाधियां
डॉ. पांडे की शैक्षणिक यात्रा की एक विशेष उपलब्धि यह भी है कि उनकी विभिन्न डिग्रियां कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), साबरमती विश्वविद्यालय, गुजरात तथा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) से प्राप्त हुई हैं। उनका मानना है कि अलग-अलग विषयों का अध्ययन व्यक्ति की सोच को व्यापक बनाता है और समाज एवं कानून से जुड़े विषयों को समझने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण विकसित करता है।
कानून, समाज और अकादमिक क्षेत्र में सक्रिय
एडवोकेट डॉ. पूरन चंद्र पांडे केवल डिग्रियां हासिल करने तक सीमित नहीं रहे हैं। वे विधिक, सामाजिक और अकादमिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। विभिन्न विषयों पर शोध एवं लेखन के साथ उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनारों में भी भाग लिया है। विभिन्न विषयों में अर्जित उनका ज्ञान उनके विधिक एवं सामाजिक कार्यों में भी दिखाई देता है। कानून के साथ समाजशास्त्र, मानवाधिकार, पत्रकारिता और विकास अध्ययन जैसे विषयों का अध्ययन उन्हें सामाजिक समस्याओं को व्यापक दृष्टिकोण से देखने में सहायता करता है।
“डिग्री नहीं, ज्ञान मेरा लक्ष्य”
डॉ. पांडे का कहना है कि उनके लिए डिग्रियां केवल प्रमाण-पत्र नहीं हैं, बल्कि निरंतर ज्ञान अर्जित करने का माध्यम हैं। उनका मानना है कि शिक्षा व्यक्ति को केवल रोजगार के लिए तैयार नहीं करती, बल्कि उसे समाज, व्यवस्था और मानवीय समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने की क्षमता भी प्रदान करती है। उनकी शैक्षणिक यात्रा युवाओं और शोधार्थियों को यह संदेश देती है कि उम्र या व्यस्तता सीखने की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि व्यक्ति में सीखने की इच्छा और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो वह किसी भी उम्र में नई उपलब्धि हासिल कर सकता है।
“सफर अभी खत्म नहीं हुआ” 19वीं डिग्री के बाद अब 20वीं की तैयारी
19 डिग्रियां हासिल करने के बाद भी डॉ. पूरन चंद्र पांडे इसे अपनी अंतिम उपलब्धि नहीं मानते। MBA के लिए आवेदन के साथ उन्होंने अपनी 20वीं डिग्री की यात्रा शुरू कर दी है। उनकी यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि ज्ञान की कोई अंतिम मंजिल नहीं होती। एक डिग्री पूरी होने के बाद दूसरी मंजिल की तलाश और नए विषय को सीखने का उत्साह ही उनकी शैक्षणिक पहचान बन चुका है। रामनगर के एडवोकेट डॉक्टर पूरन चंद्र पांडे की यह यात्रा केवल 19 डिग्रियों की कहानी नहीं, बल्कि लगभग तीन दशकों से जारी उस संकल्प की कहानी है जिसमें “सीखते रहना” ही जीवन का लक्ष्य बन गया है।