ब्रेकिंग न्यूज खटीमा:सीएम धामी ने गोलीकांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि@✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ

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खटीमा,01 सितम्बर |

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को खटीमा में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुए आन्दोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने खटीमा गोलीकांड में शहीदों की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी । उन्होंने राज्य आंदोलन शहीदो के परिजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

   मुख्यमत्री ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के दौरान खटीमा गोलीकांड में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों  भगवान सिंह सिरौला , प्रताप सिंह ,  रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट  और परमजीत सिंह को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हर नागरिक  इन सभी वीर सपूतों का सदैव ऋणी रहेगा।  राज्य आन्दोलन के अपने अनुभवों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि  इस घटना ने लोगों को उत्तराखंड के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, हम सभी मिलकर उनके सपनों के उत्तराखंड का निर्माण करें, यही उनके लिए हमारी सबसे बड़ी व सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा की धरती राज्य आंदोलन की तपोभूमि है। यदि इसे उत्तराखंड राज्य आंदोलन की जननी कहा जाए,तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने राज्य निर्माण के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि खटीमा,मसूरी, रामपुर तिराहा और मुजफ्फरनगर गोलीकांड के वीरों ने अपने रक्त से उत्तराखंड का इतिहास लिखा है। यह राज्य हमें आसानी से या उपहार स्वरूप नहीं मिला, बल्कि इसके पीछे अनगिनत बलिदानियों का कड़ा संघर्ष,त्याग और अमर बलिदान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों के आदर्शों और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए राज्य सरकार की नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया है। शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए 3 हजार रुपये मासिक पेंशन से बढ़ाकर 5500 शुरू की है, साथ ही घायल और जेल गए आंदोलनकारियों को 7000 रुपये और सक्रिय आंदोलनकारियों को 5500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। नए कानून के अंतर्गत चिह्नित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 98 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित भी किया है। आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आंदोलन में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, उन्होंने आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। राज्य निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को देखते हुए ही राज्य सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। राज्य के समग्र विकास के साथ ही प्रदेश के हित में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” को लागू किया है। देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके बाद लगभग 34 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।

सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बचाए रखने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों लागू किया गया है। प्रदेश में 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।

इस दौरान कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट एवं क्षेत्रीय विधायक भुवन कापड़ी,विधायक गोपाल सिंह राणा ने भी सम्बोधित किया।

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक खटीमा भुवन कापड़ी, विधायक नानकमत्ता गोपाल सिंह राणा, विधायक रूद्रपुर शिव अरोरा,नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जा राज्य मंत्री सुभाष बरथावल,डॉ.अनिल कपूर डब्बू किशन सिंह किन्ना, गंभीर सिंह धामी, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी,मोहिनी पोखरिया,मोहन पाठक, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा,पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा,दान सिंह रावत, नंदन सिंह खड़ायत, भगवान जोशी, जीवन सिंह धामी, अमित पांडे,जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, उपजिलाधिकारी तुषार सैनी, गौरव पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी एवं जनता मौजूद थी।

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