स्ट्रेचर समय पर उपचार न मिलने का गंभीर आरोप,स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल?✅सयुक्त मजिस्ट्रेट ने चिकित्सालय गेट पर लगे सीसी फुटेज देखने की कोशिश की, लेकिन सीसीटीवी के कैमरे ठीक ना होने के कारण वह वास्तविक स्थिति को ना समझ पाई, जिस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की, लोगों ने चिकित्सालय व्यवस्था को लेकर खरी खोटी सुनाई, नायव तहसीलदार को जांच के आदेश दिए हैं।…




रानीखेत नागरिक चिकित्सालय, नागरिकों के लिए एक ‘नरक’ अस्पताल साबित हो रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण मुख्य गेट पर घायल बुजुर्ग पूरन सिंह अधिकारी 45 मिनट तक तड़पता रहा..? लापरवाही, निकम्मेपन एवं निकरापन ‘सिस्टम’ के चलते बुजुर्ग हार गया, और ‘अंतिम यात्रा” के लिए चला गया, मौत ने इस भ्रष्ट सिस्टम पर कई सवाल पीछे छोड़ दिया!!✍️ ashok gulati एडिटर इन चीफ/संदीप पाठक संवाददाता की रिपोर्ट/विवरण के मुताबिक रानीखेत नागरिक चिकित्सालय के गेट पर एक घायल बुजुर्ग की स्ट्रेचर और समय पर उपचार न मिलने के कारण मौत हो गई। सड़क हादसे में घायल पूरन सिंह अधिकारी को ग्रामीण अस्पताल लाए थे, लेकिन कथित लापरवाही से उनकी जान चली गई।। ध्यान देने की बात यह है कि उपमंडल के सबसे बड़े गोविंद सिंह माहरा नागरिक चिकित्सालय के गेट पर घायल बुजुर्ग की मौत ने व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को नाजुक हालत में चिकित्सालय पहुंचाया गया। ग्रामीणों के अनुसार इमर्जेंसी में तैनात चिकित्साधिकारी से गुहार लगाने पर उन्होंने घायल को आपातकालीन वार्ड में लाने की सला दी। लापरवाही, निकम्मे पन का आलम यह था की घायल बजुर्ग को न तो स्ट्रेचर मिला, ना ही कोई स्वास्थ्य कर्मी मिला। तब तक बुजुर्ग की सांस चल रही थी लेकिन स्ट्रेचर के लिए आधा घंटे की आपाधापी और समय पर गहन प्राथमिक उपचार न मिलने से आखिर घायल ने दम तोड़ दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने बदहाल स्वास्थ्य सेवा की संवेदनहीनता पर हंगामा काटा। अब डॉक्टर साहब की बेतुकी सफाई भी सुन लीजिए , आपातकालीन कक्ष में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. सौरभ ने कहा कि ग्रामीणों ने यह नहीं बताया कि बुजुर्ग की स्थिति गंभीर है। इसीलिए घायल को इमर्जेंसी वार्ड में लाने को कहा गया। उपचार की आस में चिकित्सालय में बुजुर्ग को लाया गया, उसकी चौखट पर ही लापरवाही सिस्टम ने बुजुर्ग की जान ले ली। इधर दूसरी और मृतक

मजखाली निवासी 65 वर्षीय पूरन सिंह अधिकारी सोमवार को गांव में ही नामकरण समारोह में हिस्सा लेकर घर लौट रहे थे। तभी हाईवे पर एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि पूरन सिंह सड़क पर बेसुध होकर गिर पड़े।समाजसेवी नरेंद्र सिंह अधिकारी व अन्य ग्रामीण घायल को बेहोशी की हालत में नागरिक चिकित्सालय लेकर पहुंचे। उस वक्त तक बुजुर्ग की सांसें चल रही थीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपातकालीन वार्ड में तैनात चिकित्सक से लगातार बाहर आकर मरीज को देखने की गुहार लगाई गई। मगर डॉक्टर सहब ने बाहर आने की जहमत नहीं उठाई आए। घायल को इमर्जेंसी वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।…

लाचार ग्रामीण मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन एक भी स्वास्थ्य कर्मी या वार्ड ब्वाय मरीज को संभालने बाहर नहीं आया। अपनों के सामने बुजुर्ग स्ट्रेचर व उपचार के इंतजार में चिकित्सालय गेट के बाहर मौत से हार गया। और सिस्टम की नकरापन के कारण हार गए।
स्ट्रेचर के लिए जूझ रहे ग्रामीणों के गुस्सा होने पर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र सिंह नेगी मदद के लिए दौड़े। किसी तरह स्ट्रेचर की व्यवस्था की ताकि घायल को उपचार दिलाया जा सके। इधर दूसरीइसी बीच संयुक्त मजिस्ट्रेट और कोतवाल रानीखेत भी पहुंच गए। सयुक्त मजिस्ट्रेट ने चिकित्सालय गेट पर लगे सीसी फुटेज देखने की कोशिश की लेकिन सीसीटीवी के कैमरे ठीक ना होने के कारण वह वास्तविक स्थिति को ना समझ पाई। जिस पर उन्हें नाराजगी व्यक्त की। लोगों ने चिकित्सालय व्यवस्था को लेकर नाराजगी व्यक्त की। नायव तहसीलदार को जांच के आदेश दिए हैं। बरहाल जहां डॉक्टरों की घोर लापरवाही, सिस्टम नकरापन के कारण एक बुजुर्ग में दम तोड़ दिया, उनकी आत्मा इस सिस्टमको कभी माफ नहीं करेगी?