दिल्ली: “ऐसे होती है प्रधानमंत्री मोदी जी की दिनचर्या”!!!!

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👍 “प्रधानमंत्री मोदी जी की दिनचर्या”☺

सबेरे 4:45 बजे जागना:
–आपका सोने का समय जो कुछ भी हो, पर जागने का समय निश्चित 4:45 है।
—प्रति दिन सबेरे आप 30 मिनट शौच-स्नान इत्यादि में लगाते हैं।
साथ-साथ प्रमुख समाचारों को भी देख लेते हैं।
—पश्चात 30 मिनट योगासन, व्यायाम करते हैं एवं गत दिवस के संसार के समाचारों का चयन, और भारत के और भाजप के समाचारों की (चयनित) ध्वनि मुद्रिका (रिकार्डिंग) सुनते हैं।
—तदुपरान्त मंदिर में बैठ, 10 मिनट ध्यान करते हैं।
—फिर एक कप चाय लेते हैं। साथ कोई अल्पाहार (नाश्ता) नहीं लेते।
—प्रातः 6:15 बजे एक शासकीय विभाग आपके बैठक कक्ष में प्रस्तुति के लिए सजा रहता है। उनकी प्रस्तुति होती है।

—07:00 से 09:00 आई हुईं सारी संचिकाएँ (फाइलों को) देख लेते हैं।
—और फिर अपनी माताजी से दूरभाष (फोन) पर बात होती है। कुशल-क्षेम, स्वास्थ्य समाचार पूछते हैं।
(भारत का प्रधानमँत्री अपनी माँ के लिए समय निकालता है। क्या, हम भी अपनी माँ के लिए ऐसा समय निकाल पाते हैं? या हम प्रधानमँत्री जी से अधिक व्यस्त हैं?)

अल्पाहार:
—सुबह 09:00 बजे गाजर और अन्य शाक-फल इत्यादि का अल्पाहार होता है।
साथ ही निम्न विधि से बना हुआ पंचामृत (पेय) पीते हैं। (पंचामृत विधि: 20 मि.ली. मधु, 10 मि.ली. देशी गौ का घी, पुदीना, तुलसी, और नीम की कोमल पत्तियों का रस।)

कार्यालय:-
—सुबह 09:15 बजे कार्यालय पहुँचकर महत्वपूर्ण बैठकें करते हैं।

भोजन:-
—दोपहर भोजन में पाँच वस्तुएँ होती हैं। (गुजराती रोटी, शाक, दाल, सलाद, छाछ।)
—संध्या को चार बजे बिना दूध की नीबू वाली चाय पीते हैं।
—और शाम 06:00 बजे खिचडी और दूध का भोजन।
—रात्रि 09:00 बजे देशी गाय का दूध एक गिलास, सौंठ (अदरक का चूर्ण) डालकर।
—मुखवास में, नीबू, काली मिर्च, और भुंजी हुयी अजवाईन (जिससे वायु प्रकोप नहीं होता) का मिश्रण।
घूमना:-
—रात्रि 09:00 से 09:30 बजे घूमना। किसी एक विषय के ‘जानकार’ से चर्चा करते हुए साथ घूमते हैं।
—रात्रि 09:30 से 10:00 बजे सामाजिक संचार माध्यम, (Social Media), साथ-साथ चुने हुए पत्रों के उत्तर देते हैं।
विशेष:-
मोदी जी ने अपने जीवन में कभी भी पहले से बना बनाया, पूर्वपक्व आहार (Fast Food), नहीं खाया, औऱ न ही कभी बना बनाया पेय (soft drink) पिया है।
—भारत के 400 जिलों का प्रवास आपने किया हुआ है।
—जब गुजरात से दिल्ली गए, तो दो ही वस्तुएँ साथ ले गए। कपड़े और पुस्तकें। (उन्हें स्वभावतः, कपड़ो की विशेष रुचि है।)
वे एक कपड़ों से भरी हुई, और 06 पुस्तकों से भरी हुई (अलमारियाँ), अपने साथ ले गए।
—सतत प्रवास में आप रात को किसी संत कvसाथ आश्रम में, या किसी छोटे कार्यकर्ता के घर रुकते थे। होटल में कभी नहीं।
—बड़नगर वाचनालय की सारी पुस्तकें आपने पढी थी।
—किसी प्रसंग विशेष पर आप निजी उपहार में, पुस्तक ही देते थे। गत एक दशक में नव विवाहितों को “सिंह पुरुष” पुस्तक उपहार में देते थे। अब भारत के प्रधानमंत्री के नाते “भगवदगीता उपहार में देते हैं।
—वे ब्रश से नहीं, करंज का दातून करते हैं।
—उनकी रसोई में नमक नहीं, पर सैंधा नमक का प्रयोग होता है।
—प्रवास की समयावधि में संचिकाएँ (फाईलें), और चर्चा करने वाले मंत्री साथ होते हैं।
—इस आयु में भी वे सीढ़ी पर कठडे़ का आश्रय नहीं लेते।
—एक दिन में उन्होंने,19 तक, सभाएँ की हैं।
—आँख त्रिफला के पानी से धोते हैं। त्रिफला= (हरड, आँवला, बहेड़ा) चूर्ण रात को भिगोकर सबेरे उस का पानी।)
—गुजरात में मुख्यमंत्री थे तब, एक बार स्वाईन फ्लू और एक बार दाढ़ की पीड़ा के समय आप को डॉक्टर की आवश्यकता पडी थी।
—प्रधानमंत्री पद पर आने के पश्चात, गुजरात के भाजपा के कार्यकर्ताओं को दुःखद प्रसंग पर, सांत्वना देने के लिए अभी भी अवश्य दूरभाष करते हैं। (बड़े बनने पर भूले नहीं है।)
—आप की निजी सेवा में नियुक्त सभी कर्मचारियों की संतानों की शिक्षा एवं विशेष प्रवृत्तियों के विषय में आप जानकारी रखते हैं। और पूछ-ताछ करते रहते हैं! #धन्य हैं हम…… जिन्हें ऐसे व्यक्तित्व की छत्रछाया मिली… मैं तो कृतज्ञ हूँ…!
🙏🙏🙏🙏🙏


जय हिन्द जय भारत !

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