…इस बार फाइनल त्रिवेंद्र या बलूनी?

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त्रिवेंद्र रावत दिल्ली तलब, बदलेगा उत्तराखंड का मुख्यमंत्री?

उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उठा तूफान अब रफ्तार पकड़ चुका है। सीएम त्रिवेंद्र रावत आज दिल्ली तलब किए गए हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की मुलाकात जेपी नड्डा और कुछ दूसरे बड़े नेताओं से हो सकती है। इस मुलाकात के बाद ही त्रिवेंद्रे के सियासी भविष्य का फैसला होने की उम्मीद है। रोज-रोज मुख्यमंत्री बदलने की खबरें आ रही हैं इससे कार्यालय में कार्य प्रभावित हो रहा है विभिन्न अधिकारी कर्मचारी टिक्की लगाए देख रहे हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा सूत्रों का मानना है अगर त्रिवेंद्र सिंह को हटाते हैं तो राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी का बनना तय होगा दरअसल शनिवार को देहरादून में केंद्रीय पर्यवेक्षक रमन सिंह ने नेताओं से फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट तैयार की थी, जो अब आलाकमान तक पहुंचा दी गई है, इस रिपोर्ट को देखने के बाद ही त्रिवेंद्र को तलब किया गया है। चर्चा इस बात को लेकर है कि रमन सिंह के सामने ज्यादातर नेताओं ने सीएम के रवैये और उनकी कार्यशैवली पर गंभीर एतराज जताया था। जिससे संकेत साफ हैं कि नेतृत्व को लेकर उत्तराखंड बीजेपी में बगावती तेवर हैं। त्रिवेंद्र के खिलाफ इससे पहले भी पार्टी के अंदर नाराजगी जाहिर हो चुकी है। सतपाल महाराज, बिशन सिंह चुफाल, पूरन फर्त्याल, रेखा आर्य, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, चंदन रामदास समेत कई और नेता भी वक्त-वक्त पर अपना दर्द बयां कर चुके हैं। सीएम की शिकायत कई बार दिल्ली दरबार में भी कई गई, लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया। सांसद अजय भट्ट ने तो देवस्थानम बोर्ड को लेकर सरकार के फैसले की खुलकर मुखालफत की थी। हरिद्वार में कुंभ के कार्यों को लेकर निशंक ने भी इशारों-इशारों में सवाल उठाए थे। यानि विधायक, मंत्री, सांसद हर किसी ने कभी ना कभी सीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठाए थे। लगातर बढ़ती नाराजगी के बाद हाईकमान भी अब एक्शन मोड में नज़र आ रहा है, असल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में अगर पार्टी के अंदर इसी तरह का असंतोष रहा तो सत्ता बचाए रखना बड़ी चुनौती हो जाएगी, लिहाजा अब नेतृत्व परिवर्तन को ही आखिरी विकल्प माना जा रहा है, हालांकि कोई कोई बड़ा नेता इस पर खुलकर बोलने को राजी नहीं है, लेकिन अंदर खाने चर्चा यही है कि त्रिवेंद्र रावत की कुर्सी छीनी जा सकती है और उनके बदले किसी दूसरे चेहरे को कमान सौंपी जा सकती है। सियासी फिजाओं में नए सीएम के लिए कई नाम तैर भी रहे हैं लेकिन मुहर किसके नाम पर लगेगी ये भी अभी तय नहीं है। सीएम बदलने की ख़बरों को उस वक्त और ज्यादा बल मिला जब विजय बहुगुणा ने 2022 का चुनाव त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में लड़े जाने को लेकर सवाल खड़ा कर दिया। बहुगुणा ने साफ कहा कि बीजेपी में चेहरा तो सिर्फ मोदी का ही होता है, लिहाजा राज्य में किसका नेतृत्व होगा ये दिल्ली से ही तय होगा। जबकि अब तक बीजेपी में ये परम्परा रही है कि जो मुख्यमंत्री होता है चुनाव उसके ही नेतृत्व में लड़ा जाता है, ऐसे में बहुगुणा का बयान बदलाव की ओर इशारा तो कर ही रहा है? अब सवाल इसी बात को लेकर है कि आज क्या होने वाला है, सवाल ये भी है कि क्या त्रिवेंद्र रावत बतौर सीएम सरकार के 4 साल जश्न मना पाएंगे या फिर किसी दूसरे नेता को ये जिम्मेदारी सौंपी जाएगी? बहरहाल चर्चा और अटकलें कई हैं लेकिन आखिरी फैसला क्या होगा ये तो बीजेपी आलाकमान को ही तय करना है।

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