big breaking Rishikesh:💥 अल्मोड़ा वासी 13 वर्षीय बालक [स्वर्गीय] हीरा सिंह बिष्ट घर से भाग गया, उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी, ‘हीरा भाई जी’ ‘धर्मा नगरी’ मैं [जयका का] किंग’ बनेगा! ✔️’दिलचस्प सच्ची कथा’@✍️अशोक गुलाटी एडिटर-इन-चीफ ग्राउंड जीरो से :>लाइव एक्सक्लूसिव

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1965 में अल्मोड़ा निवासी हीरा सिंह बिष्ट[ स्वर्गीय] 13 साल की उम्र में घर से भागकर ऋषिकेश आ गए थे , उन्होंने छोटी-मोटी नौकरी की ,रास नहीं आई, उन्होंने ‘जय राम आश्रम चौक’Rishikesh के सामने छोटी-सी दुकान लेकर चाय व समोसा की शुरुआत की, और धीरे-धीरे दुकान चलने लगी, जब व जवान हुए. जन नौली [रानीखेत] नवासिनी राधा बिष्ट से शादी कर ली ,…

समय गति से भाग रहा था इस दौरान उनके दो बच्चे हुए जो वर्तमान में विदेश में पढ़ रहे हैं, समोसा इतना खस्ता व वह सस्ता था इसके अलावा बेहतरीन स्वाद था देखते ही देखते समोसा गढ़वाल तक प्रसिद्ध हो गया प्रतिदिन 1000 से भी अधिक समोसे बिकते हैं और स्वाद इतना जबरदस्त है कि छोटे से बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक खा सकते हैं बिल्कुल हल्का मसाला उसमें डालते हैं। किसी के घर में मेहमान या पार्टी होती है’। ‘हीरा भाईजी’ के यहां से समोसे आते हैं । कुछ वर्ष पूर्व हीरा सिंह बिष्ट का निधन हो गया। उनके निधन के बाद उनके भाई ने कारोबार संभाला। परंतु दुर्भाग्यपूर्ण उनकी भी कुछ साल के बाद मृत्यु हो गई। स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट की पत्नी राधा बिष्ट ने बताया कि इस छोटी सी दुकान से ही हमने अपने बच्चों को पढ़ाया और विदेश भेजा और ऋषिकेश में मकान बनाया; दुकान में भीड़ अधिक होने के छोटी दुकान की बगल वाली दुकान₹60000 महीने की किराए पर ली है। उन्होंने बताया कि पति की मृत्यु से पूर्व कभी भी दुकान पर नहीं आई थी। अब मजबूरी में आ रही हूं क्योंकि मेरे पति ने जो 60 साल से समोसे में नाम कमाया है ताकि वह नाम हमेशा चलता रहे , उन्होंने बताया उनका स्टाफ बहुत ही शानदार है इसलिए मुझे दुकान चलाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। उधर जब आप Rishikesh आए ;’जय राम आश्रम चौक’ के ठीक सामने हीरा भाई समोसा की दुकान है। प्रातः दुकान खोलते ही भीड़ लग जाती है। समोसे के अलावा छोले भटूरे ….

स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट की धर्मपत्नी जन नौली [रानीखेत] नवासिनी राधा बिष्ट ने अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ से क्या कहा आप भी सुनिए लाइव

तथा चावल राजमा भी काफी प्रसिद्ध है। मजेदार बात यह है कि क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा एक समाज सेवी भी हैं उनको जब समय मिलता है। दुकान में आकर हीरा भाई कि स्वर्गीय धर्मपत्नी राधा बिष्ट की मदद भी करते हैं। दुकान में अपार ग्राहकों भीड़ होने के कारण उनकी मदद भी करते हैं। एक कलमकार के व्यस्त बावजूद भी वास्तविक रूप से निस्वार्थ मदद करना एक महान कार्य है।

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