breaking काठगोदाम: [नैनीताल] 😲51 दिन से लापता 9 वीं के छात्र भास्कर का क्षत-विक्षत शव गधेरे में मिला परिवार जनों ने हत्या की आशंका व्यक्त की!>पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप?

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>51 दिन से लापता 9 वीं के छात्र भास्कर :हत्या की आशंका

काठगोदाम: [नैनीताल] 😲51 दिन से लापता 9 वीं के छात्र भास्कर का क्षत-विक्षत शव गधेरे में मिला परिवार जनों ने हत्या की आशंका व्यक्त की!

काठगोदाम क्षेत्र से 51 दिन पहले लापता हुए छात्र का सड़ा-गला शव शीतला देवी मंदिर के पास गधेरे से बरामद हुआ है। छात्र स्कूल की ड्रेस पहने पड़ा था। स्वजनों ने छात्र की हत्या की आशंका जताई है। पुलिस की जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चल पाएगा कि छात्र की मौत कब और कैसे हुई थी।

मूलरूप से ग्राम पोखरी, पुटगांव, तहसील धारी निवासी सुभाष चंद्र दुम्का का बेटा भाष्कर (15) शिवपुरी जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा में अपने फूफा मोहन सनवाल के घर पर रहता था। भाष्कर आवास विकास में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा नवीं का छात्र था। 17 फरवरी को वह घर से स्कूल के लिए निकला था लेकिन तब से घर नहीं लौटा। देर शाम तक परिवारजन उनकी तलाश करते रहे। इसके बाद काठगोदाम थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।

पुलिस जांच में छात्र अंतिम बार शीतला मंदिर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में दिखाई दिया। 51 दिन बाद सोमवार को जंगल में घास काटने गई महिला ने गधेरे में किशोर का शव पड़ा होने की सूचना पुलिस को दी । पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मोर्चरी लाई। परिजन ने शव की शिनाख्त भाष्कर के रूप में की। पुलिस के मुताबिक

मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच की जाएगी।

काठगोदाम क्षेत्र से 51 दिन पहले लापता हुए छात्र का सड़ा-गला शव शीतला देवी मंदिर के पास गधेरे से बरामद हुआ है। छात्र स्कूल की ड्रेस पहने पड़ा था। स्वजनों ने छात्र की हत्या की आशंका जताई है। पुलिस की जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चल पाएगा कि छात्र की मौत कब और कैसे हुई थ

मूलरूप से ग्राम पोखरी, पुटगांव, तहसील धारी निवासी सुभाष चंद्र दुम्का का बेटा भाष्कर (15) शिवपुरी जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा में अपने फूफा मोहन सनवाल के घर पर रहता था। भाष्कर आवास विकास में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा नवीं का छात्र था। 17 फरवरी को वह घर से स्कूल के लिए निकला था लेकिन तब से घर नहीं लौटा। देर शाम तक परिवारजन उनकी तलाश करते रहे। इसके बाद काठगोदाम थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।

पुलिस जांच में छात्र अंतिम बार शीतला मंदिर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में दिखाई दिया। 51 दिन बाद सोमवार को जंगल में घास काटने गई महिला ने गधेरे में किशोर का शव पड़ा होने की सूचना पुलिस को द । पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मोर्चरी लाई। परिजन ने शव की शिनाख्त भाष्कर के रूप में की।


पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप
भाष्कर के ताऊ चंद्र दत्त दुम्का व चाचा विवेक दुम्का का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरती। लापता बालक को ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। आरोप लगाया कि पुलिस ने भाष्कर को खोज रहे दमुवाढूंगा चौकी इंचार्ज को जांच टीम से हटा दिया था। दो सिपाही के भरोसे हमारे बच्चे की तलाश की जा रही थी। उन्होंने छात्र के साथ अंतिम बार दिखे दो बच्चों पर हत्या का शक जताया है। साथ ही बच्चों के परिजन पर धमकाने का आरोप लगाया है।

शव लाने में पुलिस को लग गए कई घंटे
सोमवार दोपहर दो बजे भाष्कर का शव बरामद हो गया था। पुलिस शव को रात आठ बजे मोर्चरी लेकर पहुंची। मंगलवार सुबह सात बजे भाष्कर के परिवारजन व रिश्तेदार मोर्चरी पहुंच गए थे। उधर पुलिस ने दोपहर 12:30 बजे तक पंचनामा नहीं भरा था। दोपहर पौने एक बजे सिपाही पंचनामा लेकर पहुंचा। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम शुरू हुआ। परिजनों का कहना था कि उन्होंने 20 किलोमीटर दूर जाना है। शव देने में काफी देर की गई।


सीएम पोर्टल और कमिश्नर से भी हुई थी शिकायत
भाष्कर के लापता होने के बाद उसके स्वजन रुद्रपुर, हल्द्वानी से लेकर अल्मोड़ा तक तलाश करते रहे। चाचा विवेक दुम्का का कहना है कि इस मामले की शिकायत सीएम पोर्टल पर की गई। कमिश्नर दीपक रावत से भी मिले। कहा कि प्रशासनिक अमला और पुलिस उनकी मदद करती तो उनका बेटा जिंदा होता।

51 दिन पानी पर शव रहने से कैसे बचा
51 दिन बाद लापता छात्र का शव मिला है। परिजन सवाल उठा रहे हैं कि जहां पुलिस बता रही है, वहां वह क्या अकेले गया था। 51 दिन पानी में रहने के बाद भी शव इस हालत में कैसे था। मोर्चरी में पहुंचे परिजन का कहना था कि शव 20 दिन पुराना हो सकता है। पुलिस चाहती तो भाष्कर को सकुशल बरामद किया जा सकता था। भाष्कर अपने घर का इकलौता बेटा था। उसकी दो छोटी बहने हैं। अच्छी पढ़ाई कराने का सपना देखकर माता-पिता ने बेटे को पढ़ने के लिए हल्द्वानी भेज दिया था। माता-पिता का कहना है कि उन्हें ऐसा पता होता तो वह उसे हल्द्वानी पढ़ने ही नहीं भेजते।


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